सोमवार को मरांग बुरु बचाओ संघर्ष समिति संथाल समाज के 51 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान संथाल समुदाय ने मरांग बुरू पारसनाथ पर्वत, पीरटांड, गिरिडीह को अपने धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में संरक्षित करने और इसके प्रबंधन की जिम्मदारी ग्रामसभा को सौंपने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। रांची से पढ़िए, यह खबर…स्रोत दैनिक जागरण
रांची। सोमवार को मरांग बुरु बचाओ संघर्ष समिति (संथाल समाज) के 51 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान संथाल समुदाय ने मरांग बुरू (पारसनाथ पर्वत), पीरटांड, गिरिडीह को अपने धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में संरक्षित करने और इसके प्रबंधन की जिम्मदारी ग्रामसभा को सौंपने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर फागू बेसरा, समिति के अध्यक्ष रामलाल मुर्मू और साहित्यकार भोगला सोरेन सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मरांग बुरू संथाल समुदाय के लिए युगों से पूजनीय स्थल है, जिसे वे ईश्वर के रूप में मानते हैं। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908, सर्वे भूमि अधिकार अभिलेख, कमिश्नरी कोर्ट और प्रीवी काउंसिल कोर्ट के तहत संथालों को इस स्थल पर प्रथागत अधिकार प्राप्त हैं। समिति ने मांग की कि मरांग बुरू को संथालों के धार्मिक स्थल के रूप में घोषित किया जाए।
पुराने आदेश को बताया असंवैधानिक
समिति ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पांच जनवरी 2023 के संशोधन मेमोरेंडम और झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग के पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि मरांग बुरू को केवल जैन समुदाय के सम्मेदशिखर तीर्थ के रूप में उल्लेखित करना एक तरफा और असंवैधानिक है। उन्होंने इस आदेश को रद्द करने की मांग की। साथ ही वन भूमि सुधार अधिकार के तहत मरांग बुरू के संरक्षण की जिम्मेदारी स्थानीय ग्राम सभा को सौंपने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को मांगों पर यथोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।













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