बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसका समापन बुधवार को हुआ। धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिए। भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से मस्तिकाभिषेक हुआ। केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
केकड़ी। मानव जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व है। जीवन में अच्छे संस्कार के लिए जिनागम के रहस्य को समझना आवश्यक है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर धर्म सभा में आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने धर्माेपदेश में कहे। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के कल्याणक महोत्सव पुण्यशाली जीव ही मना सकते हैं। जिनधर्म की प्रभावना के लिए 24 ही तीर्थंकरों के कल्याणक धूमधाम से धार्मिक कार्यों के साथ मनाना चाहिए। प्रातः आर्यिका माताजी ससंघ श्री मुनिसुव्रत नाथ मंदिर पहुंचीं तथा वहां से भागचंद ज्ञानचंद जैनम कुमार विनय कुमार सावर परिवार जिन प्रतिमा लेकर शिवम वाटिका जुलूस के साथ पहुंचे।
1008 रजत कलशों से किया महामस्तकाभिषेक
भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक हुआ। जिसमें प्रथम कलश का सौभाग्य टीकमचंद, विपिनकुमार, जितेंद्रकुमार, सानिध्य परिवार और शांतिधारा का पुण्यार्जन महावीरप्रसाद पदमचंद अक्षत बीजवाड़ परिवार ने प्राप्त किया। भगवान महावीर और आचार्य श्री का चित्र अनावरण और दीप प्रज्जवलन उपखंड अधिकारी सुभाष हेमानी तथा तहसीलदार बंटी राजपूत ने किया। भाजपा नगर अध्यक्ष रितेश जैन मौजूद रहे। समाज के गणमान्यों ने अतिथियों का स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर उपखंड अधिकारी तथा तहसीलदार ने माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि आर्यिका माताजी की प्रेरणा से जहाजपुर में एक ऐसा जहाज मंदिर बनाया है। जो विश्व प्रसिद्ध हो गया है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि आज की महिला सर्वशक्तिमान हैं। जैन धर्म की प्रासंगिकता तथा जन-जन को जिन धर्म का महत्व बताया। माताजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य टीकमचंद मोनू कुमार रामथला परिवार ने किया।













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