ललितपुर के पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृति का संरक्षण संस्कारों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने श्रावकों को चार प्रमुख सुखों का अनुसरण करने का संदेश भी दिया। पढ़िए अक्षय अलय की पूरी रिपोर्ट…
ललितपुर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य श्री 108 निर्भयसागर जी महाराज ससंघ द्वारा आयोजित भव्य धर्मसभा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति तभी तक जीवित रह सकती है, जब तक वहाँ के नागरिकों में संस्कार जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारों के संवाहक संत होते हैं और भक्तों को संत ही भगवंत का मार्ग दिखाते हैं।
आचार्य श्री ने मानव शरीर की तुलना एक वास्तु से की, जिसमें आत्मा रूपी परमात्मा निवास करता है। उन्होंने श्रावकों को चार मुख्य सुखों का अनुसरण करने की प्रेरणा दी — पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में माया, तीसरा सुख कुलवती नारी और चौथा सुख आज्ञाकारी पुत्र।
धर्मसभा का शुभारंभ अनीता मोदी और पद्मा धनगौल द्वारा मंगलाचरण से हुआ। पादप्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य राजेन्द्र जैन, रवीन्द्र दिवाकर, अक्षय अलया, अनंत सराफ, अजय जैन, अजय बरया, मनोज जैन, हितेन्द्र वडघरिया, अभिषेक अनौरा, शैलेश जैन, रवि जैन, नवीन थनवारा एवं मनीष पवैया को प्राप्त हुआ।
पुरुष्याजकों को सम्मानित किया
इस अवसर पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया, प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, मनोज जैन बबीना, राजेन्द्र जैन थनवारा और आनंद जैन मावनगर द्वारा पुरुष्याजकों को सम्मानित किया गया।गौरतलब है कि अटा मंदिर में वर्तमान में आचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ विराजमान हैं। उनके सान्निध्य में मुनि शिवदत्त सागर, मुनि सुदत्त सागर, मुनि भूदत्त सागर, मुनि पद्मदत्त सागर, मुनि वृषभदत्त सागर, क्षुल्लक चन्ददत्त सागर एवं श्रीदत्त सागर महाराज श्रावकों को नियमित रूप से धार्मिक शिक्षण प्रदान कर रहे हैं। सायंकालीन शंका समाधान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर रहे हैं।













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