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जिनेंद्र भगवान को नमस्कार करना अहंकार का विसर्जन: क्षुल्लक महोदय सागर जी ने धर्मसभा में बताया दर्शन का महत्व 


यदि किसी को अपने जीवन में मंगल करना है, तो नित्य प्रातः उठकर जिन प्रतिमा के दर्शन करने चाहिए। जिनेंद्र भगवान के दर्शन हमें निज आत्मा का दर्शन कराने वाले हैं। जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा हमारी प्रतिभा को उत्पन्न करने वाली है। उक्त विचार क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में सायंकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोककुमार जेतावत की यह खबर…


धरियावद। यदि किसी को अपने जीवन में मंगल करना है, तो नित्य प्रातः उठकर जिन प्रतिमा के दर्शन करने चाहिए। जिनेंद्र भगवान के दर्शन हमें निज आत्मा का दर्शन कराने वाले हैं। जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा हमारी प्रतिभा को उत्पन्न करने वाली है। उक्त विचार क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में सायंकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ने कहा कि जिनबिंब के दर्शन करना सम्यक दर्शन का कारण है। जिनबिंब का अवलंबन लेकर सम्यक दर्शन को प्रकट कर सकते हैं। जिनेंद्र भगवान के गुणों के चिंतवन द्वारा हम सम्यक दर्शन को प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा हमारे आत्मबोध को प्राप्त कराने वाली होती है। जिनेंद्र भगवान की वीतराग प्रतिमा हमारे भीतर भी वीतरागता प्रकट करने वाली है। क्षुल्लक श्री ने कहा कि जिनेंद्र भगवान के चरणों में नमस्कार करना अहंकार का नाशक है। जो अहंकार का नाश करके जिनेंद्र भगवान के चरणों में झुकता है, वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है। जिनेंद्र भगवान को नमस्कार करना अहंकार को विसर्जन करने वाला होता है।

प्रशांतमना कंप्यूटराइज्ड क्विज 24 को 

धर्मसभा में उपस्थित अशोक कुमार जेतावत ने संघ सान्निध्य से बताया कि क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज के सान्निध्य में गुरुवार 24 जुलाई को सायंकाल 8 बजे से प्रशांतमना कंप्यूटराइज्ड क्विज की पांचवीं कड़ी में तीर्थंकर अजितनाथ भगवान के जीवन चरित्र पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का एंड्रॉयड मोबाइल के माध्यम से आयोजन होगा। इसमें प्रथम पांच स्थान प्राप्त करने वाले प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

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