जिस घड़ी का वर्षों से इंतजार इंदौर नगर वासियों को कई सालों से था, वह इंतजार बुधवार 17 जुलाई को पूरा हो रहा है। श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज के शिष्य प्रमाणिक साधना के सुमेरू, भारतीय संस्कृति के संवाहक, वात्सल्य मूर्ति श्रमण मुनि प्रमाण सागर जी महाराज अपने ससंघ के साथ मां अहिल्या की नगरी इंदौर में मंगल प्रवेश करेंगे। पढ़िए यह रिपोर्ट…
इंदौर। जिस घड़ी का वर्षों से इंतजार इंदौर नगर वासियों को कई सालों से था, वह इंतजार बुधवार 17 जुलाई को पूरा हो रहा है। श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज के शिष्य प्रमाणिक साधना के सुमेरू, भारतीय संस्कृति के संवाहक, वात्सल्य मूर्ति श्रमण मुनि प्रमाण सागर जी महाराज अपने ससंघ के साथ मां अहिल्या की नगरी इंदौर में मंगल प्रवेश करेंगे। संपूर्ण सकल जैन समाज गुरुदेव की भव्य अगवानी को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रयासरत है,अगवानी एवं संपूर्ण चातुर्मास को सफल एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए समाज के प्रत्येक जन सक्रिय, समर्पित हैं।
समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि किसी कार्य को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए सबसे प्रमुख भूमिका होती है अनुशासन की, जिसका हम सभी को पालन करना है। बुधवार को पूज्य मुनिवर की अगवानी हेतु समाज द्वारा सविनय निवेदन है कि प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य की उपस्थित अनिवार्य है। उनके चातुर्मास कलश की स्थापना 21 जुलाई को दोपहर 1.30 बजे से मोहता भवन बास्केटबॉल काम्पलेक्स के पास जंजीर वाला चौराहा में होगी।













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