जैन समुदाय ने रोट तीज महोत्सव मंगलवार को मनाया। यह पर्व जैन समुदाय में सुख समृद्धि और धन-धान्य की स्थिरता से जुड़ा है। ब्लॉक के कई जैन मंदिरों में इस मौके पर चौबीसों भगवान की पूजा और विधान किया गया। बामनवास से पढ़िए, जिनेंद्र जैन की यह खबर…
बामनवास। जैन समुदाय ने रोट तीज महोत्सव मंगलवार को मनाया। यह पर्व जैन समुदाय में सुख समृद्धि और धन-धान्य की स्थिरता से जुड़ा है। ब्लॉक के कई जैन मंदिरों में इस मौके पर चौबीसों भगवान की पूजा और विधान किया गया। श्रावक श्राविकाओं ने इस कार्यक्रम बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर श्री वर्धमान दिगंबर जैन विकास समिति पिपलाई के सदस्य ब्रजेंद्रकुमार जैन ने बताया कि रोट तीज मांगलिक उत्सव पर परंपरानुसार महिलाओं ने व्रत, उपवास रखे और श्रावक-श्राविकाओं द्वारा घरों में रोट, घी, बूरा एवं तुरई की सब्जी और रायता बनाया गया। इस पर्व के बाद दशलक्षण महापर्व की शुरूआत होती है, जो जैन धर्म का एक बहुत महत्वपूर्ण पर्व है।
वर्धमान कोचिंग सेंटर की निदेशक एकता जैन ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल तृतीया (तीज) को जिनालयों में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। जिसमें ज्ञान रूपी लक्ष्मी का विशेष पूजन किया गया। उसके बाद जैन धर्मावलंबियों ने प्रथम रोट और खीर बनाकर कर सभी लोगों द्वारा प्रणाम कर मंदिरों में भगवान का भोग लगवाया। उसके बाद अपने इष्ट मित्रों एवं परिचितों और रिश्तेदारों को भोजन करवाकर पुण्य लाभ लिया।













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