आर्यिका श्री पूर्णिमामति माताजी सहित अनेक साधुओं की जन्मभूमि, समाधि निर्वाण भूमि पर आर्यिका श्री शीतलमति जी का सम्यक समाधि मरण शनिवार शाम 9 निर्जल उपवास के साथ हो गया। समाधिस्थ 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी की विमान यात्रा, चकडोल प्रातः 8 बजे नगर के प्रमुख मार्गाें से निकाला गया। निवाई से पढ़िए, यह राजेश पंचोलिया की यह खबर…
निवाई। आर्यिका श्री पूर्णिमामति माताजी सहित अनेक साधुओं की जन्मभूमि, समाधि निर्वाण भूमि पर आर्यिका श्री शीतलमति जी का सम्यक समाधि मरण शनिवार शाम 9 निर्जल उपवास के साथ हो गया। समाधिस्थ 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी की विमान यात्रा, चकडोल प्रातः 8 बजे नगर के प्रमुख मार्गाें से निकाला गया। चकडोल का समापन श्री पार्श्वनाथ नसिया में हुआ। संसार असार है, जीवन नश्वर है, जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए। दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भाऊं। देहांत के समय में तुमको न भूल जाऊं। मरण समय गुरु पाद मूल हो संत समूह रहे साधु जनों की संगति चहु व्रत संयम पालू ,पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सार गर्भित भावनाओं को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघस्थ आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर से दीक्षित शिष्या 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी शनिवार को दश लक्षण पर्व में समतापूर्वक पूर्ण चेतना में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध मंत्र सुनते हुए समस्त संघ सानिध्य में शाम को समाधि मरण हो गया। सूचना मिलते ही सभी समाजजनों ने अंतिम दर्शन कर संपूर्ण रात्रि णमोकार मंत्र का जाप किया।
आर्यिका श्री शीतलमति जी की डोला विमान यात्रा
1 फरवरी को प्रातः 8 बजे समाधिस्थ आर्यिका श्री शीतलमति जी की डोला विमान यात्रा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में निकाली गई। डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि का, माताजी के डोले को कंधे लगाने का, परिजनों और समाज को सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाधि स्थल नसिया जी परिसर में मंत्रोचार से शुद्धि की गई। आर्यिका श्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक परिजनों समाज के पुण्यार्जक द्वारा किया गया। उपस्थित सभी साधुओं ने अग्नि संस्कार के बाद परिक्रमा लगाई।
कठोर तपस्वी आर्यिका श्री शीतलमति जी
आर्यिका श्री शीतलमति जी ने विगत 73 दिनों में 51 उपवास कर शेष 22 दिनों में मात्र दूध ,मुनक्का पानी और 14 जनवरी से मात्र जल ही लिया। आपने 54 वर्ष के संयमी जीवन में हजारों उपवास किए। 23जनवरी को आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमायाचना कर चारों प्रकार के अन्न जल आदि का आजीवन त्याग किया। प्रतिदिन तन्मयता, एकाग्रतापूर्वक गुरुजनों का संबोधन सुनना, श्रीजी के अभिषेक देखना नियमित दिनचर्या रही थी। समाधिस्थ माताजी की विमान डोलयात्रा संत निवास से रवाना होकर पार्श्वनाथ उद्यान नसिया जी पहुंचीं। डोलयात्रा में नगर के गणमान्य सामाजिक, धार्मिक राजनीतिक, सामाजिक संगठन शामिल होकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे भक्त
टोक, मालपुरा, चाकसु, झिलाय, बोलीं, रजवास, बगडी, सिरस जयपुर, किशनगढ़ के हजारों गुरु भक्तों ने भाग लिया। हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकाली गई। समाधिस्थल पर पूर्ण विधि विधान से विमान यात्रा पूर्व नियत स्थल पर ले गए।। जहाँ पर पूर्ण विधि विधान से समाधिस्थ आर्यिका श्री का पूजन पंचामृत अभिषेक उल्टे क्रम से किए गए। अग्नि संस्कार का सौभाग्य परिजनों और समाज को प्राप्त हुआ।
अनेक साधुओं की जन्म नगरी निवाई
पवन बोहरा और हेमंत चांवरिया ने बताया कि इसके पूर्व निवाई से अनेक साधु हुए मुनि श्री विनयनंदी, आर्यिका श्री पूर्णिमामति जी, श्री गंभीरमति जी, श्री जय श्री माताजी, श्री ज्ञापक श्री माताजी, श्री भक्ति भारती माताजी, क्षुल्लक श्री शुभ सागरजी, क्षुल्लिका श्री शुद्धकुंदन मति सहित अनेक साधुओं की जन्म नगरी है। इसी प्रकार पूर्व में निवाई नगर में मुनि श्री विनयनंदी जी की वर्ष 2012, आर्यिका श्री आदिमति जी की वर्ष 2017, आर्यिका श्री सुवर्णभद्र मति जी की वर्ष 2007, आर्यिका श्री विमलमति जी की वर्ष 2011, क्षुल्लक श्री अमर नंदी जी की वर्ष 2011, मुनि श्री मर्यादा सागरजी की वर्ष 2022 सहित अनेक साधुओं की समाधि निवाई में पूर्व में हुई है।













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