पर्वाधिराज दसलक्षण पर्यूषण का छठा दिन श्रद्धालु भक्त जनों ने उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया। धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं बुंदेलखंड कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी ने अपनी पीयूष वाणी मे भक्तजनों को कहा कि संयम समझने का नहीं अंतरंग में उतारने का विषय है। संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है और इसको भगवान देवता भी मस्कार करते हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। पर्वाधिराज दसलक्षण पर्यूषण का छठा दिन श्रद्धालु भक्त जनों ने उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया। धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं बुंदेलखंड कुंडलपुर से आई गुणमाला दीदी ने अपनी पीयूष वाणी मे भक्तजनों को कहा कि संयम समझने का नहीं अंतरंग में उतारने का विषय है। संयम व्यक्ति को पूज्य और वंदनीय बनाता है और इसको भगवान देवता भी नमस्कार करते हैं। बिना संयम के मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है। दूसरों पर कंट्रोल नहीं अपने पर कंट्रोल करो जीवन को संयमित और नियंत्रित बनाना ही संयम है। मनुष्य को बाहर से नहीं अंदर से जागने की आवश्यकता है। इंद्रियों पर कंट्रोल करके ही संयम धर्म को धारण किया जा सकता है। मनुष्य को हमेशा विवेक पूर्वक काम करना चाहिए। यत्न पूर्वक कार्य करने से ही संयम होता है नियम और संयम के साथ जीवन जीना चाहिए। इसके बिना मनुष्य भी पशु के समान है।
महात्मा योगी का जीवन हमेशा स्वतंत्र जीवन होता है और मन को अपने अनुसार चलाते हैं परंतु भोगी व्यक्ति मन का गुलाम बन कर जीते हैं। निर्ग्रंथ के बिना निर्वाण की प्राप्ति नहीं हो सकती हैं। संसार के बंधन को तोड़ कर संयम धर्म को धारण किया जा सकता है,अपने को व्यवस्थित बना लेना ही संयम है,प्राणों को छोड़कर प्रण को धारण करने वाला ही संयमी होता है। इससे पहले श्रद्धालु भक्त जनों ने दोनों मंदिरों में भगवान के समक्ष बड़े ही भक्ति भाव पूर्वक” धूप दशमी” का पर्व मनाया। विश्व शांति मंत्रों को बोलकर कर्मों की निर्जरा के लिए धूप अग्नि में विसर्जित किया गया। प्रातः विधान अभिषेक पूजा में सुबोध गंगवाल ,आशा गंगवाल, शशि छाबडा और नीलम सेठी ने अपने भक्ति मय संगीत भजनों से लोगों को आनंदित एवं भाव विभोर कर रहे हैं।
प्रातः नया मंदिर में मूल नायक 1008 महावीर भगवान का प्रथम अभिषेक व शांति धारा का सौभाग्य शांति लाल-राजेश देवी छाबडा के परिवार को मिला। बड़ा मंदिर में मूल नायक पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक व शांति धारा का सौभाग्य जय कुमार-त्रिशला मनीष गंगवाल के परिवार को मिला। पांडुकशिला पर भगवान को विराजमान एवं प्रथम अभिषेक शांति धारा का सौभाग्य आशीष- अभिषेक अक्षय जैन गंगवाल के परिवार को मिला। दसलक्षण व्रतधारी परिवारों ने भी भगवान की शांति धारा की। पांडु्कशिला पर भगवान को विराजमान करने एवं प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा समाज के कोषाध्यक्ष सुरेन्द-सरिता सौरभ काला परिवार को प्राप्त हुआ। आज के विधान के पुण्यार्जक परिवार त्रिशला नेहा गंगवाल परिवार एवं अशोक अनिल विकास पटौदी परिवार थे।
दोपहर में गुणमाला दीदी और चंदा दीदी के द्वारा तत्त्वार्थसूत्र का वाचन भक्तजनों के बीच किया गया। संध्या रात्रि में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम निधि झांझरी, आरची छाबड़ा के निर्देशन में धार्मिक अंताक्षरी का कार्यक्रम हुआ। सभी विजेता प्रतियोगी को ओम -हीरा देवी सेठी और कमल-सोना सेठी के द्वारा पुरुस्कार दिया गया। समाज के पदाधिकारी राज छाबड़ा, सुरेंद्र काला, ललित सेठी, सुशील छाबड़ा, सुरेश झाझंरी, जय कुमार गंगवाल, जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन, राजकुमार अजमेरा पर्युषण महापर्व को सफल बनाने में लगे हुए हैं।













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