अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का मंगल प्रवेश श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, बजरंग नगर में हुआ, जहां मुनि का पाद पक्षालन समाज जन द्वारा किया गया। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि आत्मिक धर्म, लौकिक धर्म और सामाजिक धर्म इस प्रकार कई प्रकार का धर्म हो सकता है। कहां, किस प्रकार का कार्य करना चाहिए, यह निर्णय करना ही वास्तविक धर्म है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का मंगल प्रवेश श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, बजरंग नगर में हुआ, जहां मुनि का पाद पक्षालन समाज जन द्वारा किया गया। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि आत्मिक धर्म, लौकिक धर्म और सामाजिक धर्म इस प्रकार कई प्रकार का धर्म हो सकता है। कहां, किस प्रकार का कार्य करना चाहिए, यह निर्णय करना ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने कहा कि धर्म हमें मर्यादा में रहना सिखाता है।
मर्यादा में रहने वाला परमात्मा बन सकता है। जब आत्म चिंतन की बात आए तो वहां आत्मिक धर्म को, जब धर्म प्रभावना-पूजा करते हुए परिवार, समाज को महत्व देने की बात आए तो लौकिक को और धर्म के संरक्षण आदि की बात आए तो सामाजिक धर्म को महत्व देना चाहिए। तीनों को एक साथ मिलाने पर ही विवाद होता है।
मुनि श्री ने कहा कि राम ने पुत्र धर्म का पालन करते हुए राज्य का त्याग किया, पति धर्म निभाने के लिए रावण से युद्ध किया और राज्य धर्म को निभाने के लिए सीता का त्याग किया, तभी तो वह परमात्मा बन गए। वह मर्यादा जानते थे कि कहां कितनी जरूरी है। इससे पहले सभा का मंगलाचरण निशा जैन द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट समाज के सदस्यों द्वारा किया गया। सभा का संचालन आनंद जैन और आभार समाज अध्यक्ष अनिल जैन ने व्यक्त किया।













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