आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर नगर में आगमन हुआ। मुनिसंघ ने यहां पर विशाल जिनालय के दर्शन किए। इसके बाद यहां मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा हुई। ग्यारसपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
ग्यारसपुर। आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर नगर में आगमन हुआ। मुनिसंघ ने यहां पर विशाल जिनालय के दर्शन किए। इसके बाद यहां मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा हुई। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रातः अटारी खैजड़ा से मंगलविहार ग्यारसपुर की ओर हुआ। मंगल विहार में भोपाल विदिशा एवं राहतगढ़ के भक्त शामिल थे। प्रातःकालीन बेला में अभिषेक एवं शांतिधारा मुनि श्री के मुखारबिंद से हुई। इसके बाद प्रथम सत्र का शंका समाधान कार्यक्रम एवं आहार चर्या संपन्न हुई। इसके बाद सामायिक कर मुनिसंघ का मंगल विहार बागरौद की ओर हुआ। इस. अवसर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जीवन व्यवहार में आने वाली तथा धर्म से संबंधित शंकाओं का समाधान मुनि श्री के मुखारबिंद से प्राप्त किया। मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि समाधि का जैन धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है।
समाधि की साधना के लिए कषायों की मंदता और तथा वृत उपवास की साधना आवश्यक है। नियमित भावना योग समताभाव की वृद्धि में बड़ा सहायक हो सकता है। इस अवसर पर ग्यारसपुर के एक श्रद्धालु परिवार ने मंदिर के पास स्थित अपना 17 वाय 70 का मकान जिसमें कुंआ भी है समर्पित किया। तीनों भाइओं ने मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि श्री ने कहा कि दान जीवन को कृतार्थ करने के लिए दिया जाता है, यदि कोई व्यक्ति दान दे रहा है तो उसकी अनुमोदना अवश्य करना चाहिए।













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