शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर…
अयोध्या। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव सरोज देवी जैन, विनीता दीपक प्रकाश जैन, शालिनी धीरज प्रकाश जैन, अनुष्का दिव्यांशु जैन, सेजल, प्रियंका, सम्यक जैन, आरा बिहार, योगेश, विनीत जैन, आदित्य जैन टिकैतनगर, यशोमती जैन, आलोक, मंजू जैन, अरिहंत, खुशबू, संभव जैन, बहराइच में मनाया गया।
इन्होंने अपने घरों में ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट करके अष्टद्रव्य से आचार्य शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।
अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं और उनकी संघस्थ सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
दीक्षास्थल माधोराजपुरा में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र का हुआ विकास
सुरभि दीदी ने बताया कि आर्यिका चंदनामती माताजी ने कहा कि आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का कार्य उल्लेखनीय हैं। उनके आर्यिका दीक्षास्थल माधोराजपुरा (राज.) में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र के निकट में भी ‘गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती दीक्षा तीर्थ के विकास का कार्य किया जा चुका है।
यहां सुंदर कृत्रिम सम्मेदशिखर पर्वत का निर्माण करके 15 फीट उत्तुंग काले पाषाण वाली भगवान पार्श्वनाथ की खड्गासन प्रतिमा एवं चौबीसी विराजमान की गई है। इस तीर्थ की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा 21 नवंबर से २६ नवंबर 2010 तक पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज के सान्निध्यएवं कर्मयोगी ब्रह्मचारी रवींद्र कुमार जैन (वर्तमान पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी जी) के निर्देशन में विशेष महोत्सवपूर्वक हुई थी।













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