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अध्यात्म की राह पर : रानू ने संतों से मार्गदर्शन लेकर चुना वैराग्य का रास्ता

इंदौर।. चंडालिया परिवार की बेटी रानू अब अध्यात्म की राह पर चल पड़ी हैं। अब वह सुव्रतयशा श्रीजी हो गई हैं। रानू को घर से भाई कपिल-सचिन गोद में उठाकर दीक्षास्थल पहुंचे। सुबह 6 बजे संतों ने दीक्षा दिलाई। 9 बजे केश उतारे गए। संतों की मौजूदगी में वेष परिवर्तन, केश लोचन आदि क्रियाएं हुईं। साथ ही संतों ने उन्हें सुव्रतयशा श्रीजी नाम दिया। इसके बाद रानू ने संतों के साथ महावीरबाग स्थानक तक विहार किया। अब रानू पंच महाव्रत का पालन करेंगीं। शुक्रवार को नूतन साध्वी की पगलिये का आयोजन सुबह 6.30 बजे लोकनायक नगर से होगा।

किए सफेद वस्त्र धारण

दीक्षा स्थल पहुंची रानू का कुछ ही क्षणों में वेष बदल गया। रंगीन परिधानों, जेवरात से सजी-धजी रानू ने सफेद वस्त्र धारण कर लिए। ये देख मां अंजू

और पिता पारस जैन भावुक जरूर हुए लेकिन बेटी के त्याग पर गर्व किया व खुशी जताई। गणीवर्य आनंदचन्द्र सागर और मुनि रजतचंद्र विजय ने

26 वर्षीय रानू को दीक्षा दिलाई। सुबह 6 बजे से दलालबाग में दीक्षा कार्यक्रम हुए। बड़ी संख्या में जैन समाजजन इसमें शामिल हुए।

5 हजार किमी विहार

रानू दीक्षा से पहले संतों के साथ भी रहीं हैं। संतों से मार्गदर्शन लेकर वैराग्य का रास्ता चुना। उनके साथ 5 हजार किमी विहार कर चुकी हैं। बीकॉम करने के बाद वे सीए बनना चाहती थीं लेकिन मन में दीक्षा लेने की भावना आई। पिता पारस किराना व्यवसायी हैं।

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