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गुवाहाटी विराजमान आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर जी महाराज की हैं आज्ञानुवर्तिनी : रंगिया विराजित शिष्या श्रमणी आर्यिका 105 प्रेक्षाश्री माताजी का अवतरण दिवस मनाया


रंगिया विराजित आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज की द्वय शिष्याएं 105 परीक्षाश्री एवं 105 प्रेक्षाश्री माताजी के सान्निध्य में रंगिया मंदिर जी में पूज्य 105 प्रेक्षाश्री माताजी के 28 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय समाज सहित बाहर से पधारे सभी श्रावक -श्राविकाओं की उपस्थिति में कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धर्मसभा भी हुई। पढ़िए यह विस्तृत रिपोर्ट…


गुवाहाटी। रंगिया विराजित आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज की द्वय शिष्याएं 105 परीक्षाश्री एवं 105 प्रेक्षाश्री माताजी के सान्निध्य में रंगिया मंदिर जी में पूज्य 105 प्रेक्षाश्री माताजी के 28 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय समाज सहित बाहर से पधारे सभी श्रावक -श्राविकाओं की उपस्थिति में कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। रंगिया समाज के मंत्री प्रदुम्न बड़जात्या ने बताया कि विधान के‌ तहत पूज्य प्रेक्षाश्री माताजी का 28वां अवतरण दिवस बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया गया।

लक्ष्य प्राप्ति की कामना की

रंगिया समाज के श्रीपाल पहाड़िया ने कहा कि पूज्य माताजी ने 20 वर्ष की बहुत ही अल्प आयु में अपने गृह का त्याग कर परम पूज्य गुरुवर 108 प्रमुख सागर जी महाराज के श्री चरणों में आकर मोक्ष मार्ग के लिए अपने आप को बाल ब्रह्मचारिणी परिणिता दीदी के रूप में संघ की सेवा में समर्पित कर दिया था। अंततः अपने तीन वर्ष के अंतराल में गुरु आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज के कर कमलों से क्षुल्लिका, आर्यिका दीक्षा लेकर संयम-तप एवं साधना करती हुई अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। ऐसी साधना रत आर्यिका 105 प्रेक्षाश्री माताजी के आज जन्म दिवस के उपलक्ष्य में श्रीपाल पहाड़िया ‌ने रंगिया समाज की ओर से पूज्य माताजी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दीं, साथ ही पूज्य माताजी शीघ्र ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करें, ऐसी कामना की।

जीवन को करें सार्थक

पूज्य 105 प्रेक्षाश्री माताजी ने अपने जन्म दिवस के उपलक्ष्य पर चल रही धर्म चर्चा मे मनुष्य जीवन की सार्थकता पर कहा कि यह मनुष्य गति हमें भगवत्ता प्राप्त करने के लिए प्राप्त हुई है, न कि भोगों के लिए। इस मनुष्य गति में जैन धर्म, उत्तम जिनशासन और मनुष्य जीवन को सफल बनाने की चाबी प्राप्त करके भी अगर आपने जीवन को सार्थक नहीं किया तो समझना-दुर्गति निश्चित है।

गुरु का प्राप्त होना जरूरी

उन्होंने कहा कि जीवन को सार्थक करने के लिए मनुष्य के जीवन में किसी न किसी साधु -साध्वियों का; किसी न किसी गुरु का प्राप्त होना जरूरी है क्योंकि वह इस संसार की मुक्ति में सहायक होता है और यह भी पुण्ययोग से आप सभी को प्राप्त है। अत: इस मनुष्य जीवन में अगर तुम्हें साधु-संग मिल जाए, सत्संग प्राप्त हो जाए, गुरु का सानिध्य मिल जाए तो चूकना मत, प्राप्त कर लेना। अपने जीवन को सार्थक करने का प्रयास कर लेना वरना बहुत बड़ी चूक होगी, बहुत पछताओगे, बुरे पछताओगे। ऐसे ही आज तक जन्म-जन्म पछताते आ रहे हो, मंजिल हासिल हुई नहीं।

साधुओं का प्राप्त करो सानिध्य

उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि न मालूम कितने जन्म बीत गये, न मालूम कितने चक्कर इस आत्मा ने खाए होंगे। न मालूम कितनी दुर्गतियां भोगी होंगी, न मालूम कितनी पीड़ाएं झेली होंगी, न मालूम कितने उपद्रवों के बाद यह अनमोल मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। ऐसे में साधु-साध्वियों का सान्निध्य प्राप्त होने पर भी अगर अब भी आप जागृत नहीं हुए, गुवाहाटी में ससंघ विराजमान गुरु महान दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री प्रमुख सागर जी महाराज के होने के बावजूद भी अगर आपने अपने जीवन को सार्थक करने का प्रयास नहीं किया तो यह आपका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा।

गुरु के साथ से होगा कल्याण

उन्होंने कहा कि अगर पूरा नहीं तो थोड़ा भी अगर तुम्हारा गुरु के पास होना हो गया, गुरु के पास सांस लेना हो गया, गुरु का संग मिल गया तो उस महापुण्य की वजह से फिर किसी न किसी भव में, किसी न किसी योनि में भी आकस्मिक रूप से भी गुरु का मिलना हो सकता है, साधु का मिलना हो सकता है, संत का मिलना हो सकता है और वह मिलना निश्चित रूप से तुम्हारे जीवन के कल्याण में सहायक बन जाएगा क्योंकि यह जो बीजारोपण होगा चाहे अधूरा -अधूरा भी क्यों न हो, निश्चित फल लाएगा। याद रखना- गुरु के पास बैठकर जो थोड़ी सी भी श्वास तुम लोगे उनके हवा की, वह जन्मों-जन्मों तक तुम्हें साथ देगी। अपूर्व, अनजाने, आकस्मिक रूप से साथ देगी। तुम्हारे जाने-अनजाने साथ देगी।

भगवान महावीर धर्मस्थल में विराजमान

श्री दिगम्बर जैन पंचायत, गुवाहाटी (असम) के अध्यक्ष महावीर जैन हाथीगोला और मंत्री बीरेंद्र कुमार सरावगी ने बताया कि परम पूज्य आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर जी महाराज ससंघ गुवाहाटी की पुण्य धरा पर स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में विराजमान हैं। आप सभी इस चतुर्विध संघ का दर्शन-वंदन कर पुण्यार्जन करने के लिए सादर आमंत्रित हैं। बाहर से पधारे सभी धर्मानुरागी बंधुओं के लिए आवास, अल्पाहार एवं सुबह-शाम वात्सल्य भोजन की समुचित व्यवस्था रहेगी।

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