राजस्थान सरकार ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किया है। टोंक में चातुर्मासरत आचार्य श्री के इस सम्मान से जैन समाज में उत्सव का माहौल है। संयम, तप और सेवा के प्रतीक आचार्य श्री को यह मान्यता उनकी आध्यात्मिक साधना के लिए मिली। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजस्थान सरकार द्वारा राजकीय अतिथि घोषित किए जाने पर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। संयम साधना के 57वें वर्ष में प्रवेश कर चुके आचार्य श्री, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज परंपरा के पंचम पट्टाचार्य हैं।
आचार्य श्री के सान्निध्य में 117 से अधिक भव्य जीवों को संयम दीक्षा प्राप्त हो चुकी है। वे देशभर में धार्मिक चेतना, संयम जीवन और सामाजिक समरसता के लिए विख्यात हैं। वर्ष 1969 में उन्होंने संयम मार्ग पर पदार्पण किया और 1990 में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए।
वर्ष 2022 में भी उन्हें यह मान्यता प्राप्त हुई
राजस्थान सरकार की ओर से 4 अगस्त 2025 को जारी पत्र द्वारा उन्हें यह विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी उन्हें यह मान्यता प्राप्त हुई थी। टोंक में वर्तमान में 35 साधुओं के संघ के साथ चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री के सान्निध्य में बाहुबली के 3 महामस्तकाभिषेक (1993, 2006, 2018) और महावीर स्वामी जी का मस्तकाभिषेक (2022) जैसे कई भव्य आयोजन हो चुके हैं।
राजस्थान सरकार का आभार जताया
यह पत्र निवाई-पीपलू विधायक राम साहू वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, टोंक जिला प्रमुख सरोज बंसल, समाजसेवी बीना जैन, अमित छामुनिया आदि द्वारा उन्हें भेंट किया गया। सनावद नगर के समस्त जैन समाज ने इस सम्मान पर गौरव अनुभव करते हुए राजस्थान सरकार का आभार जताया है। इस अवसर पर मनोज जैन, मुकेश जैन, संतोष बाकलीवाल, आशीष झांझरी, सुरेश पंचोलिया, सौभाग्य चंद जैन, संदीप चौधरी, सुनील पांवणा सहित अनेक जैन श्रद्धालु उपस्थित थे।













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