महावीर जयंती महोत्सव समिति के मंच पर गुरुगल रिसर्च इंटरनेशनल एलएलपी के डायरेक्टर डॉ. अमित जैन एवं एडवोकट रीनू जैन ने 20वां रइधू राष्ट्रीय पुरस्कार उदयपुर के मुकेश जैन गोटी को दिया। यह कार्यक्रम मुनि श्री अमित सागर जी महाराज के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर आरा बिहार से डॉ. विश्वनाथ चौधरी, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डॉ. ज्योति जैन, उप्र सरकार से सम्मानित सुनील जैन का भी अभिनंदन किया गया। फिरोजाबाद से पढ़िए यह खबर…
फिरोजाबाद। विगत 11 अप्रैल को महावीर जयंती महोत्सव समिति के मंच पर गुरुगल रिसर्च इंटरनेशनल एलएलपी के डायरेक्टर डॉ. अमित जैन एवं एडवोकट रीनू जैन ने 20वां रइधू राष्ट्रीय पुरस्कार उदयपुर के मुकेश जैन गोटी को दिया। यह कार्यक्रम मुनि श्रर अमित सागर जी महाराज के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर आरा बिहार से डॉ. विश्वनाथ चौधरी, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डॉ. ज्योति जैन, उप्र सरकार से सम्मानित सुनील जैन का भी अभिनंदन किया गया। चित्र अनावरण नवीन जैन, समीर जैन, मुकुल रानीवाल ने किया। दीप प्रज्वलन एडवोकेट रीनू जैन और सीए मानवी जैन ने किया। मंगलाचरण मुकेश जैन गोटी ने किया। इस अवसर पर अतिथि डॉ. अमित जैन ने सम्मानित व्यक्तियों की दिगंबर मुनियों की सेवा, धर्म प्रभावना और सामाजिक कार्यों की सराहना की।
वर्ष 1999 में पुरस्कार की शुरुआत की थी
डॉ. अमित जैन ने बताया कि वर्ष 1999 में फिरोजाबाद के पंडित श्यामसुंदर जैन शास्त्री और प्राचार्य नरेंद्रप्रकाश जैन ने इस पुरस्कार की शुरुआत की थी। यह पुरस्कार वर्ष 2017 तक निरंतर देश के सर्वश्रेष्ठ जैन विद्वानों को शोध, शिक्षा तथा सेवा के क्षेत्र में दिया जाता रहा। वर्ष 1999 में पंडित शास्त्री का निधन हो गया। उसके बाद वर्ष 2017 तक प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन के निर्देशन में दिया जाता रहा। वर्ष 2018 में नरेंद्र प्रकाश जैन का निधन के बाद समाज की इस धरोहर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। तब से यह बंद था, जबकि समाज के कई प्रतिष्ठित लोग इससे जुड़े हुए थे।
महाकवि रइधू के नाम पर है पुरस्कार
प्राचार्य जैन के रिश्तेदार और शिष्य डॉ. अमित जैन ने इस पुरस्कार को फिरोजाबाद, चावली, पाढम, जारखी, टेहू आदि गांव में जन्मे जैन विद्वानों की स्मृति में पुनः आरंभ किया। इन विद्वानों में पंडित पन्नालाल जैन, माणिकचंद जैन, बाबू हजारीलाल जैन, स्वतंत्रता सेनानी वैद्य पन्नालाल जैन सरल, पंडित मक्खनलाल जैन शास्त्री, लालाराम जैन, प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन, श्यामसुंदरलाल जैन, शिवमुखराय जैन, पंडित गजाधर जैन और गोपालदास जैन वरैया हैं। उन्होंने बताया कि इसकी सभी प्रशस्तियां वेबसाइड पर उपलब्ध रहेंगी। पुरस्कार के लिए फंड भी डॉ. जैन की कंपनी गुरुगल रिसर्च इंटरनेशनल एलएलपी ने की है। उन्होंने बताया कि वे इस पुरस्कार को और अधिक आकर्षक बनाएंगे।
1008 जिन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की थी
महाकवि रइधू विक्रम संवत 1457 में ग्वालियर के पास मप्र में कहीं जन्मे थे। वे पद्मावती पुरवाल जैन कुल के थे। आपने संवत 1497 में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा प्रतिष्ठा गोपांचल दुर्ग में कराई थी। अब तक आपके 40 से अधिक ग्रंथ प्राप्त हुए है। आपने अपने गुरु भट्टारक गुरु कीर्ति, यशकीर्ति, शुभचंद्र आदि का नाम लिखा है। वे जैन धर्म के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने ग्वालियर के किले में गोपांचल और सिद्धांजल पर्वत पर लगभग 1008 जिन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा तोमरवंश के राजा वीरमदेव, डूंगरसिंह और कीर्तिसिंह के शासन काल में की थी। ये प्रतिमाएं वहां सन 1398 से 1536 के बीच तराशी गई थीं। इसलिए रइधू राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना उन्हीं के नाम पर की गई।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में कंपनी की उच्च स्तरीय संचालन समिति, आयोजक प्रतिनिधि मंडल, महावीर जयंती महोत्सव समिति के पदाधिकारी राजेंद्र जैन राजू, प्रमोद जैन, सोनल, सीए मानवी जैन, मोहित जैन, मुकेश जैन, नितिन जैन, आध्या जैन, अयांश जैन, नवीन जैन, समीर जैन, मुकुल रानीवाला, निखिल जैन, संजय जैन, पुष्पा जैन, रश्मि जैन, नीलू जैन, डॉ. विवेक जैन, पंकज जैन आदि मौजूद रहे।













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