परम पूज्य आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य शांतिसागर फाउंडेशन, बंगलुरु द्वारा श्रवणबेलगोला में 5 लाख से अधिक ताड़पत्र व हस्तलिखित जैन शास्त्रों के संरक्षण व संवर्धन की ऐतिहासिक पहल 11 जुलाई से शुरू हुई। यह कार्य पूज्य भट्टारक स्वामी श्री चारुकीर्ति जी के निर्देशन में संचालित हो रहा है। यह आयोजन आचार्य शांतिसागर जी के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष के अंतर्गत किया जा रहा है। पढ़िए राकेश सेठी की विस्तृत खबर…
श्रवणबेलगोला| परम् पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत, परम् पूज्य वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य वर्द्धमान सागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य शांति सागर फाउंडेशन, बेंगलुरु द्वारा श्रवणबेलगोला में एक ऐतिहासिक कार्य की शुरुआत की गई है।
दिनांक 11 जुलाई 2025 को पूज्य श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी के निर्देशन में पांच लाख से अधिक ताड़पत्र एवं हस्तलिखित जैन शास्त्रों के संरक्षण एवं संवर्धन की प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ। इस कार्य के लिए चातुर्मासरत आचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज (दक्षिण), मुनि श्री विद्यासागर जी, तथा अनेक मुनि संघ एवं आर्यिका माताजी ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
*शास्त्रों के जीर्णोद्धार का सफल कार्य हो चुका है*
ज्ञात रहे कि आचार्य शांति सागर फाउंडेशन पहले भी कुम्भोज, कारंजा जैसे स्थानों पर लाखों प्राचीन ताड़पत्र और हस्तलिखित शास्त्रों के जीर्णोद्धार का सफल कार्य कर चुका है। यह संरक्षण प्रयास जैन साहित्य, इतिहास, और धर्म के अमूल्य खजाने को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।













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