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रानी चेन्नाभैरादेवी पर डाक टिकट जारी : 50 वर्ष से अधिक राज करने वाली एक मात्र शासिका 


डाक विभाग ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में महामंडलेश्वरी रानी चेन्नाभैरादेवी पर 5 रुपए मूल्य वर्ग का एक विशेष डाक टिकट जारी किया। जिसका लोकार्पण राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, सांसद वीरेंद्र हेगडे उपस्थित थे। समारोह में जैनिज्म फिलेटेलिक ग्रुप के महावीर कुंदूर की विशेष भूमिका रही। यह गर्व करने वाली बात है कि भारत की धरती पर ऐसे-ऐसे महारथियों ने जन्म लिया है। स्वतंत्रता संग्राम की पहली रानी, जिसने रानी लक्ष्मीबाई के कई दशकों पूर्व अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। डाक विभाग ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में एक गरिमामय समारोह में महामंडलेश्वरी रानी चेन्नाभैरादेवी पर 5 रुपए मूल्य वर्ग का एक विशेष डाक टिकट जारी किया। जिसका लोकार्पण राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी व सांसद विरेंद्र हेगडे उपस्थित थे। इस डाक टिकट समारोह में जैनिज्म फिलेटेलिक ग्रुप के महावीर कुंदूर की विशेष भूमिका रही। यह गर्व करने वाली बात है कि भारत की धरती पर ऐसे-ऐसे महारथियों ने जन्म लिया है। जिनके बारे में भले ही हमारा इतिहास मौन रहा है। विदेशी इतिहासकारों ने और हमारे खुद के इतिहासकारों ने अपनी संकीर्ण मानसिकता की वजह इनको महिमा मंडित करना उचित नहीं समझा परंतु, हीरे की आभा स्वयं प्रकाशमान होती है। उसको किसी के आलंबन की जरूरत नहीं होती है। ऐसी ही एक महान विभूति हैं, रानी चेन्नाभैरादेवी। रानी चेन्नाभैरादेवी 16वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य की नागिरे प्रांत की जैन रानी थीं। उन्हें आधिकारिक तौर पर महामंडलेश्वरी रानी चेन्नाभैरादेवी के नाम से भी जाना जाता था। यह जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान एवं वरिष्ठ फिलेटेलिस्ट ओम पाटोदी ने बताया कि दक्षिण भारत में शासन तंत्र पर जैन धर्म का काफी प्रभाव रहा। वहीं कई शासक जैन धर्म के अनुयायी रहे। वहीं शासन में कई महत्वपूर्ण पदों पर जैन लोग रहे हैं।

चेन्नाभैरदेवी का नाम भारतीय इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली रानी के रूप में लिया जाता है। उनका शासनकाल 1552 से 1606 तक यानी लगभग 54 साल की अवधि का माना जाता है। उन्होंने 1559 और 1570 में पुर्तगालियों के खिलाफ युद्ध किए और उन्हें जीता भी। बाद में पुर्तगालियों के साथ वाणिज्यिक संबंध शुरू किया और भारत से मसालों का निर्यात शुरू किया। उन्होंने भटकल और होन्नावर बंदरगाहों के माध्यम से यूरोपीय और अरब क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में काली मिर्च और अन्य मसालों का निर्यात किया था। उन्हें ‘काली मिर्च की रानी’ भी कहा जाता है।

इन समाजजनों ने जताया हर्ष 

डाक टिकट जारी होने पर वर्धमानपुर शोध संस्थान एवं जैन समाज के राजेश जैन फूलजी बा, राजमल सूर्या, सुरेंद्र मूणत, राजेश मोदी, विजय बाफना, महेंद्र सुंदेचा, राजेंद्र सराफ, हेमंत मोदी, अभिषेक जैन टल्ला, सर्वेश मंडलेचा, सौरभ जैन, पवन पाटोदी, सुशील मोदी, ललित जैन, राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन, अभय पाटोदी, अभय संघवी,मनोज जैन, जयंत डोसी, लक्ष्मीकांत जैन, संतोष जैन, शैलेश जैन, सौरभ जैन, सुलभ जैन, स्वप्निल जैन आदि ने हर्ष व्यक्त किया।

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