कविता कॉलम में आज पढ़िए बेटियों पर लिखी डॉ.अभिलाषा श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक हिंदी, अंबाह स्नातकोत्तर महाविद्यालय (अंबाह) की कविता
बेटी के सम्मान में अब कुछ खास होना चाहिए,
कुदृष्टि डाले उस पर कोई शंखनाद होना चाहिए।
मनचले युवक राह में उसे घेरना चाहें भी तो
गजब शेरनी सी उसमें हुंकार होना चाहिए।
आंख बंद विश्वास किया श्रद्धा तुम बन जाओगी,
ना जाने कितने टुकड़ों में फ्रीज में रखी जाओगी।
अपने सम्मान की खातिर उत्पात होना चाहिए,
सही गलत क्या है इतना आभाष होना चाहिए।
माता पिता भाई सब से सब बात होना चाहिए,
कुछ ना छुपा सको ऐसे जज़्बात होना चाहिए।
लव जिहाद में न जाने कितनी बेटियां फंस रहीं,
लाडलियों अब भी वक्त है जाग जाना चाहिए।
क्रोध में काली और प्यार में राधा होना चाहिए,
महिषासुर और कान्हा की पहचान होना चाहिए।
रानी लक्ष्मी और झलकारी सी धाक होना चाहिए,
अपने सम्मान की खातिर रक्त पात होना चाहिए।
न कभी किसी से डरना और सकुचाना चाहिए,
बेटियों का सम्मिलित अब शंखनाद होना चाहिए।













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