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आर्यिका शीतलमति को समाजजनों ने दी भावांजलि : संयम की प्रतिमूर्ति थीं आर्यिका शीतलमति जी 


आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में शीतकालीन प्रवास के दौरान नसिया जैन मंदिर में आर्यिका श्री शीतलमति माताजी की संलेखना समाधि हो गई। आर्यिका शीतलमति माताजी के दर्शन करते हुए वंदना करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…


धामनोद। आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में शीतकालीन प्रवास के दौरान नसिया जैन मंदिर में आर्यिका श्री शीतलमति माताजी की संलेखना समाधि हो गई। आर्यिका शीतलमति माताजी के दर्शन करते हुए वंदना करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी संघ सहित संत निवास निवाई में विराजमान हैं। इस दौरान संयम की मूर्ति आर्यिका शीतलमति माताजी की संयम संलेखना समाधि हो गई।

माताजी ने अष्ट कर्म का नाश कर 8 गुणों को प्राप्त करके समाधि मरण प्राप्त किया। माताजी ने 9 दिन पूर्व एवं संल्लेखना धारण की थी। उन्होंने आहार में मात्र जल ही लिया था। प्रतिदिन माता जी को आचार्य संघ के साधु-साध्वियां संबोधित करते थे। रविवार को जिनशरणम तीर्थ में श्री शीतलमती माताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर दीपक प्रधान, समर जैन कंठाली, चेतन जैन मुंबई, महेंद्र जैन मीना प्रधान, ने दी और 9 बार णमोकार महामंत्र का जाप किया।

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