धरियावद स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय में मुकुट सप्तमी के अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव पर कृत्रिम सम्मेद शिखरजी की रचना में भगवान के पाषाण चरण प्रतिष्ठापित किए गए। पूजन, अभिषेक और निर्वाण लड्डू के साथ धर्मनगरी में भक्ति की सरिता बही। पढ़िए विस्तृत खबर…
धरियावद। श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय, धरियावद में मुकुट सप्तमी के पावन अवसर पर तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की भव्य कृत्रिम रचना के बीच भगवान पार्श्वनाथ के पाषाण चरण प्रतिष्ठापित कर निर्वाण महोत्सव अत्यंत भक्ति भाव से मनाया गया। इस अवसर पर परम पूज्य पंचम पट्टाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज एवं आचार्य कल्प श्री पुण्यसागर जी महाराज का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। विदुषी आर्यिका रत्न 105 श्री विशुद्धमति माताजी व विदुषी आर्यिका गुरुमाँ 105 श्री प्रशांतमति माताजी का पावन छत्रछाया और क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी एवं क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
भक्ति में तल्लीन दिखे श्रद्धालु
कार्यक्रम का मार्गदर्शन संहितासूरी प्रतिष्ठाचार्य पं. हँसमुख जी जैन (नंदनवन, धरियावद) व निर्देशन प्रतिष्ठाचार्य पं. विशाल जैन द्वारा किया गया। निर्वाण महोत्सव में प्रातःकालीन अभिषेक (23वें तीर्थंकर को 23 द्रव्यों से महा अभिषेक), पूजन एवं निर्वाण लड्डू अर्पण, शांतिधारा एवं 9:15 बजे से प्रवचन का आयोजन हुआ। श्रद्धालु समाज ने पार्श्वनाथ भगवान की कृपा का अनुभव करते हुए भक्ति में तल्लीनता दिखाई।













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