विश्व शांति महायज्ञ सिद्धचक्र महामण्डल विधान के अंतर्गत सिद्ध चक्र विधान की पूजा, मंदिर की नींव की खुदाई एवं वास्तु शास्त्र विधान की पूजा की गई। जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धों की आराधना एवं पूजा स्थल मंडल पर जयकारों के बीच मंत्रोच्चार के साथ 501 अर्घ्य समर्पित किए गए। पढ़िए राजकुमार अजमेरा की रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। झारखण्ड की हृदय स्थली धर्म नगरी झुमरीतिलैया में चल रहे विश्व शांति महायज्ञ सिद्धचक्र महामण्डल विधान के अंतर्गत सिद्ध चक्र विधान की पूजा, मंदिर की नींव की खुदाई एवं वास्तु शास्त्र विधान की पूजा की गई। जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धों की आराधना एवं पूजा स्थल मंडल पर जयकारों के बीच मंत्रोच्चार के साथ 501 अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रातः कालीन अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के साथ गुरुवर का चरण पखारने का सौभाग्य इस चातुर्मास कमेटी के कोषाध्यक्ष गुरुदेव के अनन्य भक्त दिलीप-आरती बाकलीवाल को प्राप्त हुआ। समाज के उपाध्यक्ष कमल सेठी, मंत्री ललित सेठी, चातुर्मास संयोजक नरेंद झांझरी ने बाकलीवाल का माला मुकुट पहनाकर स्वागत किया। मुनि श्री ने विशेष आशीर्वाद दिया। इसके बाद विधान प्रारंभ हुआ।
सभी विधानों का राजा
इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में मुनि 108 सुयश सागर ने कहा कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान सब विधानों का राजा है। विधान में सभी रिद्धि धारी महा मुनिराजों की वंदना की गई है, वर्तमान में मुनियों के पास ऋद्धि का अभाव है, मुनिराजों को ऋद्धियां तप, आराधना, संयम आदि से प्राप्त होती हैं, जिनकी आराधना- वंदना करने से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण सम्भव है। गुरु मुख से सिद्ध चक्र महामंडल विधान की महिमा बताई गई।
होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
मंदिर निर्माण कमेटी के संयोजक सुरेश झांझरी ने बताया की आज पूज्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से नया मंदिर की भूमि की खुदाई मंदिर शिलान्यास कर्ता सुरेन्द-सरिता काला परिवार ने चांदी की फावड़ा से प्रारंभ किया। इस अवसर पर सुरेन्द-सरिता काला ने बताया कि ये मेरा परम सौभाग्य है कि गुरु के मंगल आशीर्वाद से हमारे परिवार को मंदिर के नींव का खुदाई का अवसर मिला। ये सभी कार्यक्रम बैतूल से आये संजय भैया और अभिषेक पंडित के द्वारा विधि विधान से संपन्न हुए। जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन और राजकुमार अजमेरा ने बताया कि रात्रि में बाहर से आए हुए संगीतकार नाट्य कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे, जिसमें स्थानीय श्रद्धालु भक्त भी अपनी कला को दिखाएंगे। इस अवसर पर णमोकार चालीसा एवं सिद्धचक्र विधान एवं गुरुदेव की महाआरती होगी।














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