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समाज की मदद के लिए खुद कर रहे बैंक का संचालन: जरूरतमंदों की करते हैं आर्थिक मदद


सजातीय बंधुओं की आर्थिक मदद करने के उद्देश्य से लगभग दो वर्ष पूर्व तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के पावन दिवस पर अप्रैल 2023 में एक संस्था का गठन किया गया। नवगठित संस्था को ‘जैन बैंक’ नाम दिया गया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। सजातीय बंधुओं की आर्थिक मदद करने के उद्देश्य से लगभग दो वर्ष पूर्व तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के पावन दिवस पर अप्रैल 2023 में एक संस्था का गठन किया गया। नवगठित संस्था को ‘जैन बैंक’ नाम दिया गया। जैन बैंक के संस्थापक सदस्य अनिल जैन नायक (गढ़ी वाले) ने बताया कि अर्थ के अभाव में किसी सजातीय परिवार के सपने अधूरे न रहें, उन्हें किसी गैर के आगे हाथ न फैलाना पड़े, इसकी पूर्ति के लिए जैन समाज के युवाओं ने अपनी खुद की बैंक खोलने का सपना साकार करने की ओर एक कदम बढ़ाया। अर्थ के इस युग में मध्यम श्रेणी के परिवारों को समय-बेसमय पैसों की आवश्यकता रहती है। समाज का कमजोर तबका तो छोटी-मोटी जरूरतों के लिए धनाभाव के कारण सदैव ही परेशान रहता है। समाज के एक विशेष वर्ग को जब भी धन की जरूरत होती है, उसकी मदद के लिए कोई भी तैयार नहीं होता है। मजबूरी में वह सूदखोरों के चुंगल में फंस जाता है और वह निरंतर कर्ज में डूब जाता है। इन्ही सब बातों के मद्देनजर अपनी खुद की बैंक खोलने का विचार मन में उत्पन्न हुआ। स्थानीय जैन समाज के लगभग 30 युवाओं के समूह ने आपस में चर्चा करके जैन बैंक का गठन किया।

जैन बैंक किसे देता है आर्थिक मदद
मुरैना नगर में निवासरत कोई भी जैन व्यक्ति या परिवार को व्यापार, शादी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास या अन्य किसी भी सद्कार्य के लिए पैसों की आवश्यकता होने पर वह जैन बैंक की सदस्यता लेकर, ऋण के लिए आवेदन दे सकता है। बैंक के संचालनकर्ता उस व्यक्ति या परिवार की आवश्यकता की जांच पड़ताल कर आवश्यकतानुसार उसका ऋण स्वीकृत करते हैं। ऋणी व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी सुविधानुसार प्रति माह एक निश्चित राशि की किस्त जमाकर उस ऋण को वापस करता है। अभी जैन बैंक छोटे-छोटे ऋण ही स्वीकृत कर रही है। आने वाले समय में वह बड़ी धन राशि के ऋण भी स्वीकृत करने लगेगी। समाजिक अर्थ सहयोग की भावना के इस पुनीत कार्य में निरंतर लोग जुड़ रहे हैं। जैन बैंक के प्रारंभ में मात्र 30 लोग जुड़े थे लेकिन, मात्र दो वर्ष के अल्प कार्यकाल में ही इस संस्था के सदस्यों की संख्या लगभग 125 हो गई है।

संस्था के गठन का उद्‌देश्य
जरुरतमंद जैन साधर्मी बंधुओं की आर्थिक मदद कर उनकी प्रगति में सहयोगी बनना ही इस संस्था का मुख्य लक्ष्य है। संस्था का उद्देश्य है कि अतिशीघ्र एक बड़ा फंड बनाना और बड़ी राशि के ऋण स्वीकृत करना है। समाज के कमजोर तबके को आर्थिक मदद देकर उन्नति की ओर अग्रसर करना, सूदखोरों से बचाना, व्यक्तित्व विकास में सहायक बनाना ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है।।

निस्वार्थ भावना से संस्था से जुड़े हैं साधर्मी बंधु
जैन बैंक मुरैना नामक संस्था के सदस्य बनने में कोई लाभ नहीं है। वे सिर्फ और सिर्फ जनसेवा के उद्देश्य से ही जैन बैंक मुरैना के सदस्य बनते हैं क्योंकि, वे जो छोटी सी राशि प्रति माह जमा करते हैं। उन्हें उस राशि पर कोई ब्याज आदि नहीं दिया जाता है।
यदि कोई सदस्य हटना चाहता है तो उसे उसकी जमा राशि वापस कर उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है।

कैसे होती है फंड की व्यवस्था
संस्था के सभी सदस्य प्रतिमाह मात्र 500 रुपए फंड में जमा करते हैं। संस्था के गठन से आज तक धीरे-धीरे संस्था के पास अच्छा खासा फंड जमा हो गया है। उसी फंड से संस्था समाज के जरूरतमंदों को ऋण प्रदान करती आ रही है। अभी तक संस्था 31 साधर्मी बंधुओं को आर्थिक रूप से मदद दे चुकी है।

जैन समाज के सर्व वर्ग के लोग है इसके सदस्य
इस संस्था को स्थानीय जैन समाज के सभी वर्ग के लोगों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। सभी वर्ग के बंधुवर इसके सदस्य बनकर समाजोत्थान के पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता प्रदान कर रहे हैं। छोटा व्यापार करने वाले हो या उद्योगपति हो या एडवोकेट हो या शासकीय या अशासकीय नौकरीपेशा हों या रोज कमाने खाने वाले हों, गरीब हो या अमीर हों, सभी तरह के लोग अत्यंत ही उदारभाव से इस कार्य को अंजाम देने में पूर्ण तत्परता से लगे हुए हैं। सभी के सहयोग मिलने से ही इस संस्था ने अल्प समय में ही जैन समाज मुरैना में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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