दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की 155वीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…
कबीर कलयुग आइ करि, किये बहुत जो भीत।
जिन दिल बांध्या एक सूं, ते सुख सौवें निचिंत॥
यह दोहा कबीर के आत्मिक साक्षात्कार पर आधारित एक चेतावनी है। वे कलियुग में व्यक्ति की भटकती चेतना और सच्चे सुख से दूर हो चुके समाज की ओर संकेत करते हैं।
मनुष्य ने अपने चारों ओर माया, मोह, लालच, वासनाएं, भ्रम और भ्रमित मान्यताओं की अनेक दीवारें खड़ी कर ली हैं, जिनके कारण वह परमात्मा से दूर होता जा रहा है।
परंतु जो व्यक्ति “दिल को एक (परमात्मा)” से बांध लेता है,
वह आत्मिक शांति को प्राप्त करता है और जीवन के संघर्षों में भी निश्चिंतता से सोता है— अर्थात् उसे भीतर की सच्ची शांति मिल जाती है।
आज का इंसान
करियर, पैसा, रिश्ते, सामाजिक प्रतिष्ठा और मनोरंजन —
इन सैकड़ों दीवारों के बीच फंसा हुआ है।
लेकिन फिर भी उसे आत्मिक सुकून नहीं मिलता।
वह चिंतित है, भयभीत है और भीतर से अशांत है।
कबीर कहते हैं कि
जिस दिन तुम अपने दिल को एक चीज —
जैसे सच्चा प्रेम, आत्मा, ईश्वर या जीवन का उद्देश्य — से जोड़ लोगे,
उसी दिन भीतर निश्चिंतता आ जाएगी।
संसार की हजारों दीवारों में उलझा मनुष्य तभी सुखी हो सकता है,
जब वह अपने दिल को किसी एक सच्चाई से जोड़ देता है।













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