आर्यिका 105 परीक्षाश्री एवं 105 प्रेक्षाश्री माताजी को पांडू की ओर प्रस्थान करवाया है, जो अभी महती धर्मप्रभावना करती हुईं पांडू में विराजमान हैं। सरल स्वभावी, जिनशासन प्रभाविका माताजी द्वय ने पांडू में अपने प्रवचन के माध्यम से कहा कि जिन वाणी का आलंबन लेकर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। पढ़िए ओमप्रकाश सेठी की रिपोर्ट…
गुवाहाटी। परम पूज्य आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर जी महाराज ससंघ (13 पिच्छी) का भगवान महावीर धर्मस्थल, गुवाहाटी में चातुर्मास समापन उपरांत पूर्वोत्तर की विभिन्न दिशाओं में धर्मप्रभावना करने की मंशा को चरितार्थ करते हुए दिसपुर विराजित आचार्य श्री ने अपने संघ की दो आज्ञानुवर्तिनी शिष्याएं आर्यिका 105 परीक्षाश्री एवं 105 प्रेक्षाश्री माताजी को पांडू की ओर प्रस्थान करवाया है, जो अभी महती धर्मप्रभावना करती हुईं पांडू में विराजमान हैं। सरल स्वभावी, जिनशासन प्रभाविका माताजी द्वय ने पांडू में अपने प्रवचन के माध्यम से कहा कि जिन वाणी का आलंबन लेकर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भव्य आत्माएं बहुत ही उल्लासित मन से जिन वाणी को श्रवण करती हैं, जितना पुरुषार्थ हम धर्म के मार्ग पर करेंगे, उतना ही हमारा पुण्य प्रबल होगा। श्री दिगम्बर जैन पंचायत, गुवाहाटी (असम) के मंत्री बीरेंद्र कुमार सरावगी ने बताया कि पांडू विराजित द्वय माताजी के दर्शन-वंदन एवं मांगलिक प्रवचन का जो सधर्मी बंधु लाभ लेना चाहें वे पांडू जाकर ले सकते हैं। मालूम हो गुवाहाटी से पांडू की दूरी मात्र 7 किलोमीटर है।













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