आचार्यश्री विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और श्री श्रुतसागरजी कडेगांव में विराजमान हैं। 26 जून को मुनिश्री सारस्वत सागर जी ससंघ का महाराष्ट्र प्रांत के प्राचीन तीर्थ क्षेत्र कुंडल में मंगल प्रवेश होगा। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे(महाराष्ट्र )। आचार्यश्री विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और श्री श्रुतसागरजी कडेगांव में विराजमान हैं। 26 जून को मुनिश्री सारस्वत सागर जी ससंघ का महाराष्ट्र प्रांत के प्राचीन तीर्थ क्षेत्र कुंडल में मंगल प्रवेश होगा। कुंडल में भगवान पार्श्वनाथ और भगवान महावीर स्वामी जी का समवशरण आया था। यहां पर उनकी दिव्य देशना खिरी हुई थी। यह हमारी जैन संस्कृति की प्राचीनता को बताता है। हमारा जैन धर्म कितना प्राचीन है, कितना महान है और कितना मनोरम है। यहां पर नवग्रह मंदिर है। पहाड पर झरी पार्श्वनाथ जी का मंदिर है। जिसमें अति मनोहर प्रतिमा है। गिरी पर्वत है। उसी से हमारे जैन संस्कृति, श्रमण संस्कृति की पहचान है। कुंडल तीर्थ पर्वत का अनुपम नजारा है, जहां रेत से निर्मित है अतिशयकरी प्रतिमा, जो विख्यात है झरी पार्श्वनाथ नाम से। ऐसे सुंदर जिनबिंब के दर्शन से महा शांति मिलती है।
जहां से श्रीधर केवली भगवान मोक्ष गए और श्रीधर केवली के चरण चिन्ह हैं। श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील, सेक्रेटरी सुधीर चौधरी, अनिल पाचोरे, एनजे पाटील, सुधीर भोरे, मनोज पाटील, शुभम पाचोरे, सुहास पाचोरे, सुदर्शन पाटील, सतीश पाटील (पोपट पाटील), सोनू उपाध्ये, दादासाहेब पाटील(इंगळे ),सुरज पाचोरे, निखिल पाटील, विनय पाचोरे, अभय सकळे, गुलाब मुजावर, भगवान महावीर जैन मंदिर कमेटी व पूजा महामहोत्सव कमेटी, वीर सेवादल नांद्रे, वीर महिला मंडळ, पार्श्व महिला परिषद, जैन युवा मंच के युवा पदाधिकारी, प्रभावणा समिति के कार्यकर्ता आदि श्रावक-श्राविकाओं के मुनिराजों का इंदौर से नांद्रे तक विहार और 2025 के चातुर्मास को सफल करने के लिए प्रयास जारी हैं।













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