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जैन उपासना स्थलों पर कब्जा गंभीर चिंता का विषय: सामूहिक प्रयासों से समस्या का समाधान खोजे जाएं


जैन समाज के उपासना स्थलों पर बलात कब्जे की घटनाओं गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। वास्तव में यह बहुत खेदजनक भी है कि जैन तीर्थ और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजीकृत) के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ने बताया कि जैन समाज एक शांतप्रिय समाज है। जैन ने इन घटनाओं को चिंतनीय बताया है। नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर…


नई दिल्ली। जैन समाज के उपासना स्थलों पर बलात कब्जे की घटनाओं गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। वास्तव में यह बहुत खेदजनक भी है कि जैन तीर्थ और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजीकृत) के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ने बताया कि जैन समाज एक शांतप्रिय समाज है। जो अहिंसा परमो धर्मः एवं जियो और जीने दो के सिद्धांत पर अपना व्यवसाय आदि कर जीवनयापन करती है। कुछ समय से देखने में आ रहा है कि इस शांतप्रिय समाज के उपासना स्थलों पर अन्य समाज के आसमाजिक तत्व बलात कब्जा कर माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जो जैन समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आज के इस युग में यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि कई स्थानों पर अन्य समुदायों के लोग जैन मंदिरों और तीर्थस्थलों पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। यह केवल धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, विरासत और पहचान पर सीधा आघात है। जैन मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं हैं। वे हमारे सांस्कृतिक इतिहास, आध्यात्मिक मूल्यों और अहिंसा व सत्य पर आधारित जीवन शैली के प्रतीक हैं। इन पर किसी भी प्रकार का कब्ज़ा या परिवर्तन हमारी आत्मा को ठेस पहुंचाने जैसा है।

अब समय आ गया है कि जैन समाज एकजुट होकर, शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से अपनी धार्मिक संपत्तियों की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए। हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपनी विरासत की रक्षा करें, आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखें और स्पष्ट रूप से यह संदेश दें कि जैन धर्म की संपत्ति केवल जैन समुदाय की है और रहेगी। हम सभी को एकजुट होकर शासन-प्रशासन द्वारा कब्जा आदि रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और अपनी आस्था और पहचान की रक्षा करने के लिए आइए, हम सब साथ आएं।

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