श्री दिगम्बर जैन मंदिर लार मे चल रहे दशलक्षण का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म के साथ धूमधाम मनाया गया। इसके साथ ही जैन धर्म के नवें तीर्थंकर श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक बड़े ही भक्ति भाव से मनाया गया। पढ़िए मुकेश जैन लार की रिपोर्ट…
टीकमगढ़। निकटवर्ती श्री दिगम्बर जैन मंदिर लार में चल रहे दशलक्षण का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म के साथ धूमधाम मनाया गया। इसके साथ ही जैन धर्म के नवें तीर्थंकर श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक बड़े ही भक्ति भाव से मनाया गया। प्रातः जैन धर्म के 9वें तीर्थंकर श्री पुष्पदंतनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक, शांतिधारा कर पूजा प्रक्षाल की गई। शांतिधारा करने का महासौभाग्य पदम् जैन, संतोष, सौरभ जैन को प्राप्त हुआ।
इसके पश्चात भगवान पुष्पदंतनाथ की पूजा, सोलहकरण पूजा, पंचमेरू पूजा और दशलक्षण पूजा और उत्तम शौच धर्म की पूजा मुख्य रूप से की गई। इसके बाद दशलक्षण विधान का वाचन किया गया। पंडित कमल कुमार शास्त्री द्वारा उत्तम शौच धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तम शौच धर्म का तात्पर्य लोभ का त्याग करना है। लोभ वास्तव में पाप का बाप है। लोभ में फंस कर ही मनुष्य पाप की ओर अग्रसर होता है।













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