कस्बे में दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी में अभिषेक पूजन के पश्चात निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इसके अलावा सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री खंडेलवाल आदिनाथ छोटा जैन मंदिर, श्रीमन्दर जिनालय, महावीर जिनालय सहित पोदनपुर, णमोकार धाम, मोरटक्का सहित सिद्धवरकूट जी में भी निर्वाण लाडू अर्पित किए गए। पढ़िए सन्मति जैन काका की विशेष रिपोर्ट…
सनावद। दिगंबर जैन समाज 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक पंच पर्व दीपावली के अगले दिन 13 नवंबर को मनाया गया। हर वर्ष दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन के दिन ही सुबह भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाए जाते हैं, लेकिन इस बार दीपावली के दिन सुबह चतुर्दशी तिथि होने तथा कार्तिक अमावस्या दोपहर बाद लगने से अगले दिन सोमवार सुबह को निर्वाण लाडू अर्पित करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर सोमवार सवेरे सर्वप्रथम दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी में अभिषेक पूजन के पश्चात निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य भूपेंद्र कुमार लश्करे परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं उसके बाद सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री खंडेलवाल आदिनाथ छोटा जैन मंदिर, श्रीमन्दर जिनालय, महावीर जिनालय सहित पोदनपुर, णमोकार धाम, मोरटक्का सहित सिद्धवरकूट जी में भी निर्वाण लाडू अर्पित किए गए।

जियो और जीने दो का दिया संदेश
समाज प्रवक्ता सन्मति जैन काका मुताबिक जैन धर्म में धन-यश तथा वैभव लक्ष्मी के बजाय वैराग्य लक्ष्मी प्राप्ति पर बल दिया गया है। कार्तिक अमावस्या की सुबह भगवान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक हुआ था और इसके बाद शाम को गौतम गणधर को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अतःभगवान महावीर के दिव्य-संदेश ‘जियो और जीने दो’ को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वर्ष-प्रतिवर्ष कार्तिक अमावस्या को दीपमालिका सजाकर भगवान महावीर से कृपा-प्रसाद प्राप्ति के लिए लड्डुओं का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसे ‘निर्वाण लाडू’ कहा जाता है।













Add Comment