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ज्ञानतीर्थ पर मनाया गया निर्वाण लाड़ू एवं दीक्षा महोत्सव: जैन मन्दिर से ज्ञानतीर्थ तक निकाली गई भव्य पदयात्रा


सारांश

मुरैना में भगवान आदिनाथ मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाड़ू एवं गुरुमां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का 27वां दीक्षा दिवस महोत्सव धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ मनाया गया। आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने धर्मसभा को सम्बोधित किया। मनोज नायक की रिपोर्ट।


मुरैना। जैन धर्म के प्रवर्तक, प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ ने हमें असि, मसि, कृषि का अहिंसामयी उपदेश दिया। हम सभी उनके सिद्धांतों का, उनके उपदेशों का सदैव अक्षरशः पालन करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। प्रभु आदिनाथ ने कर्म सिद्धान्त का उपदेश देते हुए कहा है कि जैसी करनी, वैसी भरनी। आप जैसे कर्म करोगे, आपको परिणाम भी उसी के अनुसार मिलेंगे। “बोया पेड़ बबूल का,आम कहां से होय”। यदि आपने बबूल के बीज का रोपण किया है तो आम की उम्मीद कैसे कर सकते हो। इसीलिये प्राणी को सदैव अच्छे व नेक काम करते हुए अहिंसामयी जीवन जीना चाहिए। उक्त विचार जैन साध्वी गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में श्री आदिनाथ निर्वाण लाड़ू एवं पूज्य गुरुमां के दीक्षा दिवस महोत्सव में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किए।

भगवान आदिनाथ को पांडुक शिला पर किया विराजमान
ज्ञानतीर्थ क्षेत्र मुरैना में भगवान आदिनाथ मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर निर्वाण लाड़ू एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का 27वां दीक्षा दिवस महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ धूमधाम से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। भगवान आदिनाथ को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलशाभिषेक किये गए।

मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री पारस जैन, मुरैना के मंगलाचरण से हुआ। चित्र अनावरण श्री योगेश जैन (खतौली वाले) दिल्ली, श्री आनन्द जैन (खेकड़ा वाले) दिल्ली, श्री रूपेश नीलम जैन (चांदी वाले) आगरा, सतीश जी दिल्ली, जिनेन्द्र जी दिल्ली, राकेश जी दिल्ली, आशीष जी, अरविंद जी विकासनगर ने किया। दीप प्रज्ज्वलन विनीत जैन (आईपीएस), संजीव जैन (आयुक्त), मुकेश जी आगरा, सुनील जैन बन्धु आगरा, महेशचंद बंगाली (अध्यक्ष), धर्मेंद्र जैन एडवोकेट (मन्त्री) ने किया। कार्यक्रम का संचालन ब्र.मनीष भैयाजी एवं ब्र. बहिन अनीता दीदी ने किया।

घोड़ा बग्गियों में भगवान आदिनाथ के स्वरूप विराजमान थे
भगवान आदिनाथ को प्रथम निर्वाण लाड़ू अर्पित करने, गुरुदेव सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज एवं गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य गुरुभक्त श्री आनन्द जी जैन (खेकड़ा वाले) सूर्यनगर दिल्ली को प्राप्त हुआ। पद यात्रा के संयोजक अनूप भण्डारी ने बताया कि इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव एवं गणिनी आर्यिका गुरुमां के पावन सान्निध्य में मुरैना जैन मन्दिर से ज्ञानतीर्थ तक एक विशाल एवं भव्य पद यात्रा निकाली गई जिसमें सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बन्धु, माता-बहिनें एवं युवा साथी सिर पर केशरिया टोपी एवं गले में पचरंगी पट्टिका डालकर चल रहे थे। सभी के हाथों में शाकाहार एवं अहिंसा के प्रचार प्रसार हेतु स्लोगन लिखी तख्तियां शोभायमान हो रही थीं। बैंड- बाजों के साथ घोड़ा बग्गियों में भगवान आदिनाथ के स्वरूप में माता-पिता, सौधर्म इंद्र रूपेश नीलम जैन आगरा, श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले), श्री पंकज जैन मेडीकल आदि विराजमान थे। श्री नरेंद्र कुमार कुलभूषण रिंकू जैन ने पद यात्रियों को स्वल्पाहार कराकर सभी का आत्मीय स्वागत किया।

बानमोर की बालिकाओं के सुंदर नृत्य ने सबका मन मोहा
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत बानमोर की बालिकाओं ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। संगीतकार एवं भजन गायक मनीष एंड पार्टी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविराज श्री नमोकार जैन ने भगवान आदिनाथ पर काव्य पाठकर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के पश्चात सभी के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।

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