जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
आगरा। हरिपर्वत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जैनी के भगवान स्वयं खाते नहीं, खाने देते नहीं या चढ़ाना बंद करें, वो करते नहीं। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि
1.बडों को देना लेना नहीं- हमारी जिंदगी में कितने राज हम छिपाये बैठे हैं। माता-पिता से बेटा छिपाए बैठा है। पति- पत्नी एक-दूसरे से छिपाए बैठे हैं, गुरु भगवान से छिपाकर बैठे हैं। देव,शास्त्र और गुरु के सामने कभी गरीब मत बनना। कुछ न कुछ लेकर जाना। जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है। आशीर्वाद भी नहीं लेना। उनसे कुछ नहीं लेना। बडों से लेकर पेट नहीं भरना। ललित नगर के राजा और मथुरा नगरी के राजा वरांग के बीच युद्ध हुआ। ललित नरेश हारने वाले थे। उन्होंने आधा राज्य देने को वादा किया। राजा वंराग ने ललित नरेश को जिता दिया और आधा राज्य लेने से मना कर दिया।
2. जीवन की गुत्थी कोई नहीं सुलझा सकता। शास्त्र में समाधान बता सकते हैं। विपरीत परिस्थितियों में कैसे निपटें, हम णमोकार मंत्र चाहते हैं।
3. अकाल मृत्यु-किसी अपरिचित, धर्मात्मा जिसका मरना निश्चित है, डॉक्टर के कहने पर हम 10 लाख रु देकर एक मिनट जिंदा रख दें तो क्या मिलेगा। यदि आपने ये किया तो आपकी अकाल मृत्यु ‘कभी नहीं होगी, ये निश्चित हो गया, नहीं न।
4. मौत का डर-मोक्ष का दरवाजा उनके लिए खुलता है, जिन्हें मौत का डर नहीं है। बाहुबली भगवान के शरीर पर सांप के बिल बन गये लेकिन डर नहीं था। सुकौशल मुनि महाराज को श्यालनि खा रही है, फिर भी डर नहीं। ऐसे मुनि महाराज जी का मोक्ष होना है।
प्रवचन से शिक्षा -पुण्यात्मा का सम्मान करें
(सकंलन ब्र. महावीर)













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