श्री मुनिसुव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, स्मृति नगर में चातुर्मास कर रहे अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि मंदिर के दान का पैसा और मंदिर की वस्तुओं का उपयोग करना निर्माल्य है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। श्री मुनिसुव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, स्मृति नगर में चातुर्मास कर रहे अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। महायज्ञ में पुण्याहवाचन मंगल कलश एवं अखंड दीप प्रज्वलन शोभा-विनोद जैन एवं प्रदीप बिलाला द्वारा किया गया। पुण्याहवाचन कलश से विश्व शांति के कामना करते हुए जल धारा अर्पित की गई। कार्यक्रम में सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक और शांतिधारा श्रावकों द्वारा की गई। महायज्ञ में 527 मंत्रों की घी, धूप के द्वारा आहुति दी गई। विधि-विधान का कार्य ब्रह्मचारी अजय भैया द्वारा किया गया।
अपने द्रव्य से करो भगवान की पूजा
इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि मंदिर के दान का पैसा और मंदिर की वस्तुओं का उपयोग करना निर्माल्य है। निर्माल्य को ग्रहण करने वाला अशुभ गति में जाता है और अनेक बीमारियों से ग्रसित रहता है। मुनि श्री ने कहा कि मंदिर में जो दान बोला जाता है, वह भी अगर देर से देते हैं और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा धर्म के लिए नहीं निकालते तो वह भी आप के लिए निर्माल्य है। धन की गति नहीं होती। भाव से भक्ति कर लेना लेकिन धर्म के पैसे का उपयोग कभी मत करना। भगवान की पूजा भी करो तो अपने द्रव्य से करो। किसी और के द्रव्य से पूजा करना पाप का कारण है।














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