शहर में इन दिनों चातुर्मास के दौरान मुनिराजों के प्रवचन धर्म प्रभावना के माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्तम सीख प्रदान कर रहे हैं। विदित है कि यहां आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ विराजित होकर चातुर्मास कर रहे हैं। इसी दौरान उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थसागर जी महाराज के यहां नित्य पूजन अभिषेक के बाद प्रवचन हो रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
पथरिया। शहर में इन दिनों चातुर्मास के दौरान मुनिराजों के प्रवचन धर्म प्रभावना के माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्तम सीख प्रदान कर रहे हैं। विदित है कि यहां आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ विराजित होकर चातुर्मास कर रहे हैं। इसी दौरान उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थसागर जी महाराज के यहां नित्य पूजन अभिषेक के बाद प्रवचन हो रहे हैं। उन्होंने प्रवचन में कहा कि इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं, उसके अंदर होता है। वो ख्याल, जो उसे आगे बढ़ने नहीं देते। हम सबके अंदर एक सपना होता है, एक मंज़िल होती है, लेकिन जब हम चलने लगते हैं तो रास्ते में सबसे पहले जो रुकावट आती है, वो हमारे अपने विचार होते हैं। क्या मैं कर पाऊंगा? अगर असफल हो गया तो? लोग क्या कहेंगे? ये सवाल नहीं, ये ज़ंजीरें हैं और सबसे दुःख की बात ये है कि ये ज़ंजीरें किसी और ने नहीं, हमने खुद ने बनाई होती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मकड़ी भी अपने जाल में फंस जाए, ये शायद ही होता है। लेकिन इंसान? वो अपने ही ख्यालों में इतना उलझ जाता है कि सच की राह तक देख नहीं पाता। याद रखिए, सोचिए ज़रूर, लेकिन इतना नहीं कि सोच ही आपका रास्ता रोक दे। चलिए, गिरिए, उठिए लेकिन, अपने खयालों के गुलाम मत बनिए क्योंकि, जिस दिन आपने अपने खयालों पर काबू पा लिया, उस दिन कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।













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