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नारोल में महा शांतिधारा शांति विधान हुआ: मुनि श्री सदभाव सागर जी ने किया मंगल विहार


नारोल स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर चैत्यालय में रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं धर्मभावना से ओतप्रोत धार्मिक आयोजन हुए। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण रहा और समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अहमदाबाद से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट…


अहमदाबाद। नारोल स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर चैत्यालय में रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं धर्मभावना से ओतप्रोत धार्मिक आयोजन हुए। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण रहा और समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रातः 7.15 बजे भगवान श्री चंद्रप्रभु स्वामी का दिव्य अभिषेक एवं महाशांतिधारा हुई। इसके बाद प्रातः 9 बजे क्षुल्लक श्री प्रम्योग सागर जी का केशलोचन कार्यक्रम अत्यंत भावविह्वल वातावरण में हुआ। जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु वैराग्य और संयम की भावना से अभिभूत हो गए। इस अवसर पर पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सद्भाव सागर जी महाराज की मंगलमय उपस्थिति विशेष प्रेरणादायी रही। प्रातःकालीन मंगल प्रवचन मुनि श्री सद्भाव सागर जी महाराज के श्रीमुख से हुए। जिसमें उन्होंने आत्मजागरण, संयम, क्षमा एवं धर्माराधना का प्रेरक संदेश प्रदान किया। दोपहर 2.30 से सायं 4. 50 बजे तक शांतिविधान मुनि श्री सद्भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में हुआ। विधान उपरांत भगवान मल्लिनाथ जी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर लाडू समर्पण का विशेष आयोजन किया गया।

“नमोस्तु शासन जयवंत हो” के उद्घोष से वातावरण गूंजा

श्रद्धालुओं ने अपार भक्ति एवं उल्लास के साथ मोक्ष कल्याणक का उत्सव मनाया। जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। सायं 5बजे गुरुदेव का मंगल विहार इसानपुर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, धर्मदेव के लिए हुआ। समाजजनों ने भावभीनी विदाई देते हुए पुनः पधारने की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। “नमोस्तु शासन जयवंत हो” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर समाज के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का हृदय से आभार प्रकट किया। यह आयोजन समाज की एकता, श्रद्धा और धर्मप्रभावना का उज्ज्वल उदाहरण सिद्ध हुआ।

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