श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने कहा कि सत्य का अर्थ है, हमेशा सच बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना और ऐसे शब्दों से बचना जो दूसरों को ठेस पहुंचाएं।
महरौनी। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर हुई धर्मसभा में मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य का अर्थ है, हमेशा सच बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना और ऐसे शब्दों से बचना जो दूसरों को ठेस पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि जो साधक अपनी वाणी पर संयम रखते हुए सत्य धर्म का पालन करता है, उसे न केवल मानसिक शांति और आनंद मिलता है, बल्कि उसे समाज और परलोक दोनों में ही राजा हरिश्चंद्र के समान सम्मान प्राप्त होता है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता, जबकि झूठ बोलने वाले की सदा निंदा होती है।
सत्य केवल शब्द नहीं
मुनिश्री मेघदत्त सागरजी ने कहा कि सत्य केवल शब्द नहीं है, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। सत्य में वह शक्ति है जो मन को शांत करता है, संबंधों को मजबूत करता है और आत्मा को ईश्वर के समीप लाता है। उन्होंने बताया कि हमें कठोर वचनों से बचना चाहिए और प्रिय एवं सत्य वचन बोलना चाहिए। पराई निंदा और असत्य से सदैव वचन बचना आवश्यक है, क्योंकि जब विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता आती है, तभी वास्तविक सत्य धर्म का पालन होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।
उपस्थित प्रमुख जनों में यह थे
इस अवसर पर कोमलचंद सिंघई, अनिल मिठया, प्रमोद सिंघई, प्रकाशचंद्र सिंघई, प्रसन्न कुमार सिंघई, ऋषभ कठरया, पवन मोदी, ऋषभ सिंघई, प्रदीप चौधरी, प्रशांत सिंघई, प्रवीण सिंघई, हेमंत सिंघई, जिनेश्वर बुखारिया, शिखरचंद मिठया, सुनील मोदी, प्रमोद चौधरी, अजित कठरया, पुष्पेंद्र चौधरी, आशीष मोदी, अक्षय खजांची, अभिनंदन सिंघई, पवन जैन (पार्षद), सत्येंद्र सिंघई, ऋषभ मैगुंवा, अभिषेक सिंघई, महेंद्र बाबा, शैलेंद्र गुढ़ा, आमोद चौधरी, राकेश सतभैया, नीलेश सराफ, आकरष बड़कुल, राजू कठरया, रमेश भायजी, अंकुर कठरया, नमन लौंडुआ, अर्पित बड़कुल, वीर मिठया, अनुपम सिंघई, सुनील सतभैया, अनिल लौंडुआ, शानू, अजय बड़कुल आदि शामिल रहे।













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