मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंबर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य होगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंम्वर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया, नितिन भैया, अनिल भैया के निर्देशन में श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर के पास वैभव नगर में धर्म प्रभावना समिति के नवरत्न परिवार के साथ संपन्न होने जा रहा है। जिसका मुख्य संयोजक हर्ष जैन महामंत्री धर्मप्रभावना समिति को बनाया गया है।
2 दिसंबर सुबह 7 बजे निकलेगी घटयात्रा
2 दिसंबर को प्रातः7 बजे घटयात्रा श्रीजी की शोभायात्रा के साथ गोयलनगर जिनालय से प्रारंभ होकर कार्यक्रम स्थल वैभवनगर तक आएगी। यंहा पर ध्वजारोहण तथा मंडप उदघाटन, मंडप शुद्धि होकर सकलीकरण एवं इंद्र प्रतिष्ठा होगी। दोपहर 1 बजे से याज्ञमंडल विधान एवं हवन होगा एवं रात्रि 8.30 बजे से सौधर्म इंद्र का दरबार लगेगा। जिसमें तत्वचर्चा, कुबेर द्वारा रत्नवृष्टी माता के सोलह स्वप्नअष्ठ कुमारी देवियों द्वारा माता की सेवा आदि दृश्य दिखाऐ जाऐंगे।
सभी धर्म श्रद्धालुओं से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में पधारने का किया अनुरोध
3 दिसंबर को गर्भ कल्याणक उत्तरार्ध एवं 4 दिसंबर को जन्म कल्याणक की क्रियायें संपन्न होंगी। 5 दिसंबर को तप कल्याणक एवं 6 दिसंबर को ज्ञान कल्याणक एवं 7 दिसंबर को मोक्षकल्याणक मनाया जाएगा। धर्मप्रभावना समिति के सभी नवरत्न भरतमोदी, मुकेश पाटौदी, नवीनगोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, रमेश निर्वाणा, सुनील विलाला, योगेंद्र सेठी, धर्मेन्द्र जैन सहित सकल दिगंबर जैन समाज इंदौर सभी धर्म श्रद्धालुओं से निवेदन करती है कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव कार्यक्रम में पधार कर पुण्यलाभ अर्जित करें।
उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है – मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी
मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी ने नेमीनगर दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुये चार बातें- आसक्ति, अत्यासक्ति, अनासक्ति और विरक्ति पर चर्चा करते हुये कहा कि “वस्तु, व्यक्ति, धन संपत्ति अथवा देहआकर्षण के प्रति लगाव ही आसक्ति और अनासक्ति को जन्म देता है और वह दुःख प्रदान करता है। मुनि श्री ने कहा कि सबसे ज्यादा हमारा आकर्षण देह के प्रति होता है “पहले तो माता बहनें ही ब्यूटी पार्लर जाती थीं लेकिन आजकल तो पुरुष भी जाने लगे हैं” मुनि श्री ने कहा कि अपने शरीर के प्रति जागरूकता रखो लेकिन उसके प्रति इतने आसक्त मत हो जाओ कि देह के पीछे उस विदेही को ही भूल जाओ। उन्होंने कहा कि शरीर एक साधन है, विवेकहीन मनुष्य इस शरीर के माध्यम से जंहा संसार को पुष्ट करते हैं वहीं विवेकवान पुरुष इस शरीर के माध्यम से अपनी आत्मा को पुष्ट करते हैं। जो व्यक्ति संसार, शरीर और भोगों की वास्तविकता को समझता है वह इसमें रमता नहीं, उसे शरीर की क्षणभंगुरता का अहसास होता है और वह वैराग्य को धारण कर अपने जीवन का उद्धार कर लेता है। जो इसमें उलझा रहता है वह अपने संसार को और बढाता है।” मुनि श्री ने कहा कि पुरानी पीढ़ी में पैसा को जोड़ने की कला थी। वह अनावश्यक खर्च नहीं करते थे। वहीं नयी पीढ़ी में धन की कमी तो है नहीं, खूब कमाते हैं और सब कुछ भोगों में खर्च कर देते हैं। भोगासक्ति की इस आदत से पिज्जा, बर्गर आदि फास्ट फूड और तरह-तरह की वस्तुऐं आनलाईन मंगा लेते हैं तथा बीमारियों से घिरे रहते हैं। वर्तमान समय में उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है तथा व्यक्ति देह आकर्षण में उलझ कर रह गया है। धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया दोपहर 1.30 बजे मुनिसंघ गुमास्ता नगर, सुदामा नगर इंद्रलोक आदि कालोनियों के जिनालयों के दर्शन करने गये। सांयकाल का शंका समाधान एवं रात्रि विश्राम नेमीनगर में ही हुआ।













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