भोपाल के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री संधान सागर महाराज ने सोमवार प्रातः 5 बजे से लगातार 24 घंटे तक प्रतिमायोग साधना धारण की। वे 48 घंटे बाद ही आहार-जल ग्रहण करेंगे। पढ़िए राजीव सिंघई की ख़ास रिपोर्ट…
भोपाल (अवधपुरी) के श्री विद्या प्रमाण गुरुकुलम स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार प्रातः 5 बजे से मुनि श्री संधान सागर महाराज ने प्रतिमायोग धारण किया। वे एक ही आसन और मुद्रा में 24 घंटे तक ध्यानस्थ रहे तथा नियम अनुसार वे 48 घंटे बाद ही आहार व जल ग्रहण करेंगे।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुनि श्री, आचार्य प्रमाण सागर महाराज के संघस्थ हैं और वे पूर्व में भी कई स्थानों पर लंबी अवधि के प्रतिमायोग साधना कर चुके हैं। पिछले सोमवार को भी भोपाल में उन्होंने प्रतिमायोग धारण किया था। इससे पूर्व वे सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी, पावापुरी, चम्पापुरी, बावनगजा, गजपंथा, रामटेक, अंजनगिरी और एलोरा की तीर्थंकर लेणी पर 24 घंटे से लेकर 72 घंटे तक के प्रतिमायोग कर चुके हैं।
फल और सब्जियों का भी परित्याग कर रखा
मुनि श्री संधान सागर महाराज का तप और त्याग अनुकरणीय है। उन्होंने लगभग 22 वर्षों से नमक और शक्कर का त्याग किया है तथा विगत 6 वर्षों से हरे फल और सब्जियों का भी परित्याग कर रखा है। उनकी निरंतर साधना जैन धर्म की प्रभावना का महान उदाहरण है। समाज ने इस तपस्वी संत को श्रद्धा और नमन अर्पित किया तथा उनकी साधना को जैन धर्म के वैराग्य और आत्मशुद्धि का जीवंत संदेश बताया।













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