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नेमिनाथ भगवान का मनाया गया मोक्ष कल्याणक : कर्म बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष है : विनम्र सागर महाराज


श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में हो रहे नेमिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक मनाया गया। पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया देख श्रावक अभिभूत हो गए। पढ़िए यह रिपोर्ट…


ललितपुर/ बानपुर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में हो रहे नेमिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक मनाया गया। पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया देख श्रावक अभिभूत हो गए। सुबह आठ बजे श्रीजी का अभिषेक कर शांति धारा की गई। इसके उपरांत देव, शास्त्र, गुरु का पूजन व भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। मोक्ष कल्याणक की पूजा की गई व विश्व शांति महायज्ञ किया गया। अग्नि कुमार के देवों द्वारा भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक की क्रियाएं की गईं।

इस अवसर पर परमपूज्य आचार्य विनम्र सागर महाराज ने विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्म बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष है। संसार में कर्मों के कारण ही जीव परिभ्रमण करता है। यह जीव जब कर्मों से रहित हो जाता है तो लोक के अग्रभाग में सिद्ध शिला पर विराजमान हो जाता है। जैन दर्शन में इसी को ही मोक्ष कहते हैं। भगवान नेमिनाथ ने भी गिरनार पर्वत पर दिगंबर दीक्षा धरण की और वहीं पर चार घतिया कर्मों का अक्षय किया और केवल ज्ञान को प्राप्त किया।

इसके बाद कुबेर इन्द्र के द्वारा समवशण की रचना की गई और दिव्य ध्वनि के माध्यम से भव्य जीवन को धर्म का उपदेश दिया और लगभग सात सौ वर्षों तक देश देशांतरों में भ्रमण कर अंत में गिरनार पर्वत से संपूर्ण कर्मों का क्षय कर निर्वाण को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इस कड़कड़ाती ठंड में दिगंबर जैन संत निर्भीक होकर अपनी तप साधना में लीन रहते हैं। श्रावक जन भी अपने घर परिवार को छोड़कर के पंचकल्याणक महोत्सव देखने के लिए आ रहे हैं। यह उनकी प्रभु भक्ति व संत के प्रति आस्था का द्योतक है। पंचकल्याणक समिति द्वारा आए हुए सभी जनों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

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