महरौनी के श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मोक्ष सप्तमी पर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मुनि गुरु दत्त सागर जी एवं मुनि मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने शांतिधारा, महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू समर्पण कर धर्मलाभ लिया। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…
महरौनी। यहाँ के श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव गुरुवार को श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। यह आयोजन मुनि श्री गुरु दत्त सागर व मुनि मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में हुआ।
प्रातःकालीन पूजन में शांतिधारा, 1008 कलशों से महामस्तकाभिषेक और निर्वाण लाडू समर्पण हुआ। कल्याण मंदिर विधान के साथ भक्तों ने भगवान की वंदना की। मुनिश्री गुरु दत्त सागर ने प्रवचन में कहा, “मोक्ष का अर्थ है — कर्मों से मुक्ति, आत्मा की शुद्ध अवस्था।”
विधान, शांतिधारा, और लाडू समर्पण की प्रक्रिया
मुनिश्री मेघदत्त सागर ने मोक्ष को आत्मा की परम अवस्था बताते हुए कहा कि यह मनुष्य जीवन को सार्थक बनाता है। दोपहर में यशोदय तीर्थ पर विधान, शांतिधारा, और लाडू समर्पण की प्रक्रिया हुई। महिलाओं ने निर्जला व्रत रख इस पुण्य दिन की गरिमा बढ़ाई।
कमठ का उपसर्ग” नाटक प्रस्तुत
शाम को पाठशाला के बच्चों द्वारा “कमठ का उपसर्ग” नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म में आने वाली बाधाओं को पार करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में शताधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। महिला परिषद द्वारा सपना सिंघई के निर्देशन में “लाडू सजाओ प्रतियोगिता” भी आयोजित की गई, जिसने वातावरण को जीवंत बना दिया।













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