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आचार्य श्री विरागसागर की विनयांजलि सभा में आध्यात्मिकता का संदेश: आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में किया पुण्य स्मरण 


आचार्यश्री विरागसागर जी के प्रथम समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा हुई। इसमें समाजजनों ने आचार्यश्री से जुडे़ संस्मरण सुनाएं। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का गुणानुवाद किया। आचार्यश्री निर्भयसागर जी ने धर्मसभा में संबोधन दिया। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…


 ललितपुर। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में धर्मसभा में आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि श्रावक लोग मंदिर में धान के चावल चढ़ाते हैं, यदि धान में वि उपसर्ग लगा देते हैं तो विधान बन जाता है। विधान में सम उपसर्ग लगते हैं तो संविधान बन जाता है। इसलिए हमें पूजा-पाठ करते समय संविधान का पालन करना चाहिए। अपने देश के प्रति प्रेम रखना चाहिए। देह के प्रति नहीं प्रेम आत्मा की संपत्ति है। प्रेम के बिना जीवन चलना संभव है। प्रेम होने पर ही व्यक्ति अहिंसा का पालन करता है। आचार्य श्री ने कहा कि सर्वप्रथम पारिवारिक प्रेम होता है, जो सुरक्षा व्यवस्था और आत्मीयता से जुड़ा होता है। पारिवारिक प्रेम को स्टार्च फ्रेम कहते हैं। दूसरा प्रेम रोमांटिक प्रेम होता है, जो उत्तेजनात्मक भावात्मक और क्षणिक होता है। तीसरा आत्मिक प्रेम होता है, जो आध्यात्मिक की ओर ले जाता है। भगवान की भक्ति पूजा और परोपकार की ओर ले जाता है। यही सच्चा प्रेम है।

सबको हिल-मिलकर एक जैसा रहना चाहिए

आचार्य श्री ने कहा कि समाज में खरबूजे जैसी एकता बनाए रखना चाहिए अर्थात बाहर से समितियां भले ही अलग-अलग हो लेकिन, अंदर से सबको हिल-मिलकर एक जैसा रहना चाहिए। समाज में संतरा जैसा बनकर नहीं रहना चाहिए। संतरा बाहर से एक अखंड दिखता है लेकिन, अंदर प्रत्येक कली अलग-अलग होती है। उस कली के अंदर प्रत्येक रस की पोटली अलग-अलग होती है। इस संतरा की तरह रहने से घर परिवार समाज और देश का विभाजन हो जाता है। अखंडता खंडित हो जाती है। प्रेम समाप्त हो जाता है। आचार्य श्री ने कहा व्यक्ति को दया अहिंसा करुणा प्रेम का स्वभाव नहीं छोड़ना चाहिए।

समाज के श्रेष्ठीजनों ने संस्मरण सुनाए 

प्रातः काल सिद्ध चक्र विधान में प्रतिष्ठाचार्य पंडित संतोष अमृत एवं अभिषेक जैन दमोह ने प्रभु के अभिषेक शांतिधारा की। मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर वक्ताओं ने उन्हें वात्सल की प्रथम मूर्ति बताया और उनके जीवन के अनेक संस्मरण सुनाएं। वक्ताओं ने कहा कि गणाचार्य महाराज ने समाज को सन्मार्ग बताया।

महिला मंडल ने कराई भजन संध्या 

संचालन जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने किया। साइन कल आरती के उपरांत भजन संध्या महिला मंडल ने कराई। जिसमें अनीता मोदी, अनुपमा बजाज, वीणा जैन, मनीशा जैन, प्रीति जैन, ज्योति औलिया, स्मिता जैन, नीतू जैन का योगदान रहा। अभिनंदनोदय के प्रबंधक मोदी पंकज जैन ने आचार्य श्री से ससंघ 6 जुलाई को अभिनंदनोदय तीर्थ में चातुर्मास स्थापना के लिए निवेदन किया। इस अवसर पर जन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टड़या, सनत खजुरिया, कैप्टन राजकुमार जैन, मनोज जैन, बबीना अजय जैन, अक्षय आलिया, अमित सराफ,नरेश मुक्ता, कैलाश जैन, अखिलेश जैन गदयाना मौजूद रहे।

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