कर्नाटक में जैन संत श्री काम कुमार नंदी महाराज की हत्या के विरोध में डूंगरपुर जैन समाज के आह्वान पर शुक्रवार को डूंगरपुर शहर बंद रहा। इससे बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, जैन समाज ने शहर में आक्रोश रैली निकाली। पढ़िए तुष्टि जैन की विस्तृत रिपोर्ट…
डूंगरपुर। कर्नाटक में जैन संत श्री काम कुमार नंदी महाराज की हत्या के विरोध में डूंगरपुर जैन समाज के आह्वान पर शुक्रवार को डूंगरपुर शहर बंद रहा। इससे बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, जैन समाज ने शहर में आक्रोश रैली निकाली। कलेक्ट्री के सामने प्रदर्शन कर जैन संत के हत्यारों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाने की मांग की गई।

जैन समाज की ओर से बंद के आह्वान के तहत सुबह से ही डूंगरपुर शहर में दुकानें नहीं खुली और बाजार बंद रहे। सकल जैन समाज के साथ ही सर्वसमाज, व्यापारिक संगठन और कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। दुकानें नहीं खुलने से बाजारों में भी सन्नाटा रहा। मेडिकल स्टोर के साथ कुछ छुट-पुट दुकानें ही खुली रहीं। जैन समाज के साथ सर्वसमाज के लोग शहर के न्यू कॉलोनी, हेड पोस्ट ऑफिस के सामने माताजी मंदिर के पास इकट्ठे हुए।

धर्मसभा में मुनि श्रुतधर नंदजी महाराज, मुनि उत्कृष्ट कीर्ति महाराज, मुनि सुमंतसागर महाराज, क्षुल्लक सुप्रभात सागर महाराज ने जैन आचार्य की हत्या की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की हत्या कर धर्म को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके खिलाफ सर्वसमाज में जबर्दस्त आक्रोश है। इसके बाद सर्व समाज की ओर से शहर में आक्रोश रैली निकाली गई। रैली शहर के न्यू कॉलोनी से सुभाष नगर गार्डन रोड, सिंधी कॉलोनी, शनि मंदिर रोड से होते पुराना बस स्टैंड, तहसील चौराहा से कलेक्ट्री पहुंची।

लोगों ने साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्री के सामने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। सर्वसमाज ने हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाने की मांग की है। वहीं, साधु-संतों को सुरक्षा दिलाने की भी मांग रखी गई।
ये रहीं प्रमुख मांग
– भारत के समस्त राज्याें में संत संरक्षण बाेर्ड की स्थापना।
– जैन धर्म, जैन तीर्थ, संत सुरक्षा के लिए जैन संरक्षण बाेर्ड की स्थापना।
– कर्नाटक राज्य में जैन संताें काे राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाए।
– श्री कामकुमार नंदी महाराज की हत्या की साजिश का पूरा खुलासा किया जाए।
– निर्मम हत्या का मुकदमा फास्ट ट्रैक काेर्ट में चलाकर सख्त सजा हाे, ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं हाे।













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