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आपके शब्द अमृत का काम करें : मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के समान


मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ इंदौर विराजित हैं। उनके सानिध्य में भक्तजन धर्मसभा का लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के मार्गदर्शन में सुमतिधाम में पट्टाचार्य महा महोत्सव होगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर…


इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि श्री सहजसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रेयससागर जी महाराज यहां विराजमान है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि आपके शब्द हमेशा अमृत का काम करें। जहर का नहीं, क्योंकि कुछ लोगों के शब्द कांटों से भी ज्यादा नुकीले होते हैं। सही बात है-कांटों का तो नाम ही बदनाम है। वरना चुभती तो निगाहें भी हैं। काटती तो जुभानें भी हैं। मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के स्पर्श के समान हैं।

गुरु के प्रति समर्पण बने आदित्य

उन्होंने MBA (Gold Medalist) जैसी शैक्षिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया। जिसके पास विलासितापूर्ण जीवन जीने के अनेकों विकल्प मौजूद थे, जिसकी प्रखर दैहिक आभा, अप्रतिम सुंदरता, अद्वितीय बुद्धिलब्धि और पुण्य-शक्ति के आगे सभी सांसारिक सुख किसी चरण चंचरिक की तरह उसके सामने नतमस्तक होने को तैयार बैठे थे। परंतु इन सब मोह और सुखों के आगे तो भोगी झुका करते हैं। योगी नहीं, सन्मति भैया ने जो पथ चुना था। वह इन सब से ऊपर था। निर्ग्रंथ पथ और फिर सन्मति भैया ने 8 नवम्बर 2011 को गुरु के प्रति समर्पण विशुद्ध-सागर में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गए वह थे “सन्मति”, पर जो बाहर आए वह थे ‘आदित्य’।

पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से

मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम में होगा।

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