वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि सूर्य का मकर और कर्क राशियों के संक्रमण का अन्य राशियों से धर्म ग्रंथों में अधिक महत्व है। इस में भी मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। यूं तो सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस तरह पंचांग में 12 राशियां होती हैं। सूर्य एक के बाद एक हर राशि में एक माह रहता है। इसके एक से दूसरी राशि में प्रवेश अर्थात संक्रमण को ही संक्रांति कहा जाता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि सूर्य का मकर और कर्क राशियों के संक्रमण का अन्य राशियों से धर्म ग्रंथों में अधिक महत्व है। इस में भी मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
इस दिन गंगा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। यह त्योहार जनवरी माह में 14 या 15 जनवरी के दिन ही पड़ता है। जब 13 जनवरी की रात सूर्य का मकर राशि में रात्रि 12 बजे के बाद से 14 के दिन रहते तक प्रवेश हो तो उस साल 14 जनवरी के दिन पुण्य पर्व काल यानी मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है और जिस साल 14 जनवरी को रात्रि 12 बजे बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करे तो फिर दूसरे दिन यानी 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर मनाया जाता है। इस बार 14 जनवरी की रात्रि 02:42 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा है इसलिए 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जायेगा।
सौर केलेंडर से होती है गणना
जैन ने बताया कि यह ऐसा हिंदू त्योहार है जो चंद्रमा की विभिन्न स्थितियों के आधार पर मनाए जाने वाले अन्य हिंदू त्योहारों में से एक है। चंद्र कैलेंडर के बजाय सौर कैलेंडर के अनुसार इसकी गणना की जाती है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं जबकि रातें छोटी होने लगती हैं।
मकर संक्रांति पुण्यकाल कब? – 15 जनवरी प्रातः 07:07 मिनट से सायं 05:47 बजे तक मकर संक्रांति पुण्य काल रहेगा अर्थात पूरे दिन पर्व रहेगा।
महापुण्यकाल -प्रातः 07:07 बजे से प्रातः 08: 53 बजे तक सर्व श्रेष्ठ रहेगा।
मकर संक्रांति पर्व विधि
15 जनवरी को इस बार मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले उठकर साफ- सफाई कर लें। इसके बाद अगर संभव हो तो आसपास किसी पवित्र नदी तालाब कुआं आदि में स्नान करें। यदि ऐसा न कर पाएं तो घर में ही गंगाजल मिलकर स्नान करके खुद को शुद्ध कर लें। इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, तो पीले वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। अंत में आरती करें और दान करें। दान में गर्म कपड़े, तिल युक्त वस्तुओ को जरूर दान करना चाहिए।
दान करने का खास महत्व
जैन ने कहा इस दिन से मलमास इसके साथ समाप्त होगा। धनु मल मास भी सूर्य के मकर में प्रवेश के साथ समाप्त हो जायेगा और विवाह, ग्रह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि अन्य शुभ कार्य भी फिर से शुरू होंगे। आगे के छह महीने सूर्य उत्तरायण रहने से देवताओं के दिन माने गए हैं। इन दिनों में दिन धीरे धीरे बड़े और राते छोटी होती जायेंगी। गर्मी का अहसास भी धीरे-धीरे बढ़ेगा। कहते है महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग करने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था।













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