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महावीर महामंडल विधान आध्यात्मिक शुद्धि, कर्मों का नाश और मोक्ष कारक : श्री महावीर स्वामी दिगम्बर जैन मंदिर परिवहन नगर के स्थापना दिवस पर हुआ भव्यातिभव्य विधान 


नगर के पश्चिम क्षेत्र में अंतिम शासन नायक 1008 श्री महावीर स्वामी दिगम्बर जैन मंदिर परिवहन नगर की स्थापना के 15 वर्ष पूर्ण होने पर स्थापना दिवस मनाया गया। अंतर्मुखी 108 मुनि श्री पूज्य सागर जी सानिध्य में कई विधियों से धार्मिक कार्यक्रम किए गए। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के गुरु भक्त, श्रद्धालु और श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहकर साक्षी बने। इस पुनीत अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा नित्य नियम, पूजन, दीप प्रज्वलन, मुनि श्री चरण प्रक्षालन, विधान पूजन, मुनि श्री के प्रवचन, महावीर चालीसा, श्रीजी और मुनि श्री की आरती, भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


इंदौर। नगर के पश्चिम क्षेत्र में अंतिम शासन नायक 1008 श्री महावीर स्वामी दिगम्बर जैन मंदिर परिवहन नगर की स्थापना के 15 वर्ष पूर्ण होने पर स्थापना दिवस मनाया गया। अंतर्मुखी 108 मुनि श्री पूज्य सागर जी सानिध्य में कई विधियों से धार्मिक कार्यक्रम किए गए।

इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के गुरु भक्त, श्रद्धालु और श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहकर साक्षी बने। इस पुनीत अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा नित्य नियम, पूजन, दीप प्रज्वलन, मुनि श्री चरण प्रक्षालन, विधान पूजन, मुनि श्री के प्रवचन, महावीर चालीसा, श्रीजी और मुनि श्री की आरती, भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया।

स्थापना दिवस पूर्ण आस्था और भक्ति भाव के साथ सकल दिगम्बर जैन समाज ने मनाया। प्रातः काल मूल नायक श्री महावीर स्वामी के अभिषेक हुए। राजेंद्र जैन भामगढ़ ने शांतिधारा की। शांतिधारा का वाचन मुनि श्री ने किया।

महावीर मंडल विधान में मंगल कलश अखंड दीप स्थापित 

संयम काल में सर्वाधिक अवधि, अनेक तीर्थों की प्रेरक 400 से अधिक ग्रंथों की रचयिता प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी की शिष्या गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति जी द्वारा रचित श्री महावीर विधान मंडल पर सौभाग्यशाली परिवारों ने मंगल कलश अखंड दीप स्थापित किए।

नव देवता के पूजन के बाद प्रमुख पात्र सौधर्म ईशान कुबेर, माहेन्द्र इंद्र, सामान्य इंद्र द्वारा पूजन कर मंडल पर अर्ध्य समर्पित किए गए। विधान में भगवान के गुणों का अर्थ अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी ने बतलाया।

जिसमें 16 कारण, भावना, 16 स्वप्न, 34 अतिशय के गुणों 48 प्रातिहार्य, 18 दोष, 12 गण, ऐसे 7 वलय में 108 गुणों के अर्घ्य चढ़ाए गए।

इन समाज श्रेष्ठीजनों ने अर्घ्य किए अर्पित 

नवनीत जैन देवचन्द्र जैन, चंदन रावका ने बताया कि सौधर्म इन्द्र सोनम बादल जैन, नीलम, कुबेर इंद्र श्रेष्ठी दीपाली जैन, यज्ञनायक इंद्र-दीपक सुनयना जैन परिवार, ईशान इन्द्र-पंकज ज्योति जैन परिवार, महेन्द्र इंद्र शशिकांत आज्ञा जैन,राजेंद्र हंसा, सामान्य इंद्र महेश दादाजी, चंद्रप्रभा, जय कुमार ललिता मोदी, चेतन भारती, देवचंद, नवीता, प्रमोद, सुलेखा, राजेश बबीता पाटनी, राजेश ममता, नवनीत कल्पना, रूपाली योगेश गोठाण, संगीता राजेश पंचोलिया, अलका कमल, पंकज नेहा, नीरज जया, अखिल मोनिका, सुधांशु राजेश बीना, नितेश प्रतिमा धनोते, रश्मि अजय प्रकाश, वैभव कविता झांझरी, अनिल अर्चना जमोरिया, रोहित आरती, शशिकांत आज्ञा अलका रावका, मनोज मंझरी, ऋषभ जैन ऋषि नगर, शैलेन्द्र निधि, अमित भावना दबाड़े, पुष्पा दबाड़े, राकेश , मुकेश नूतन ,रोहित मीनल जैन ने अर्घ्य समर्पित किए।

शाम को सन्मति प्रभु की आरती हुई। महावीर प्रभु का चालीसा पाठ हुआ। भक्तामर का पाठ 8 से 11बजे तक हुआ चन्दन रावका परिवार की ओर से दुग्धपान की व्यवस्था की गई।

मनोकामना सिद्धि विधान में छलका अपार श्रद्धा का अनुपम रूप 

श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन जिनालय, परिवहन नगर के स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को परिवहन नगर में मनोकामना सिद्धि विधान हुआ। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के सानिध्य में बड़ी धूमधाम से इसका आयोजन किया गया।

सर्वप्रथम दीप प्रज्जवन और पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट का सौभाग्य नीटू सिंह सपना जैन, बादल सोनम जैन, मातु नीलम जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मंडल पर मुख्य कलश स्थापनाकर्ता शुभ्रिता, योगेन्द्र, शोभित, सुहानी जैन व मंडल पर जिनवाणी विराजमान पुण्यार्जक देवचंद, नविता, निश्चय जैन परिवार रहे। प्रतीक सलोनी जैन के पुत्र, राजेंद्र रेखा जैन के पोते का नामकरण संस्कार मुनिश्री के मुखार बिंद से किया गया।

आज के विधान के सौधर्म इंद्र-नीटू सिंह सपना जैन, बादल सोनम जैन, मातु नीलम जैन परिवार, कुबेर इंद्र-श्रेष्ठी दीपाली जैन, हर्ष शानल जैन, दर्श जैन परिवार, महेंद्र इंद्र पंकज ज्योति, ऋषभ जैन, परिवार ईशान इंद्र-एवं अखंड दीप प्रज्वलन कर्ता शशिकांत आज्ञा जैन परिवार, यज्ञ नायक-दीपक सुनैना, गौरांश एकांशी जैन परिवार को सौभाग्य प्राप्त हुआ।

महावीर महामंडल विधान का महत्व

महामंडल विधान का जैन धर्म में बहुत महत्व है। यह एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान है जो भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि, कर्मों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति है।

आध्यात्मिक शुद्धि: यह विधान आध्यात्मिक शुद्धि और मन की शांति के लिए किया जाता है।

कर्मों का नाश: विधान के दौरान, भक्त अपने कर्मों का नाश करने और नए कर्मों से बचने का प्रयास करते हैं।

मोक्ष की प्राप्ति: विधान का अंतिम लक्ष्य मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करना है, जो जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति है।

भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा: यह विधान भगवान महावीर के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का एक तरीका है।

सामूहिक पूजा: महामंडल विधान एक सामूहिक पूजा है, जो समुदाय में एकता और भक्ति की भावना को बढ़ावा देती है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार: विधान के दौरान सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो भक्तों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

धार्मिक शिक्षा: यह विधान जैन धर्म के सिद्धांतों, जैसे अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह की शिक्षा देता है।

संक्षेप में: महावीर महामंडल विधान एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो आध्यात्मिक शुद्धि, कर्मों का नाश, मोक्ष की प्राप्ति, और भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

कार्यक्रम में सहयोग

कार्यक्रम में विशेष सहयोग महावीर नवयुग मंडल, प्रियकारिणी महिला मंडल, भोजन व्यवस्था सहयोगी राजेंद्र जैन, लोकेंद्र जैन, वर्णित जैन का रहा।

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