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मनाई गयी अक्षय तृतीया : उदासीन आश्रम द्रोणगिरि में अक्षय तृतीया को हुई महापारणा


सुविख्यात उदासीन आश्रम में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को मुनि अवस्था में प्रथम बार इक्षु रस से हुए आहार दिवस अक्षय तृतीया के महापर्व पर उपाध्याय मुनि श्री आदिश सागर जी महाराज की अहार महापारणा हुई। इस अवसर पर अनेक महानुभावों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। पढ़िए रत्नेश जैन रागी बकस्वाहा की रिपोर्ट…


द्रोणगिरि सेंधपा। यहां के सुविख्यात उदासीन आश्रम में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को मुनि अवस्था में प्रथम बार इक्षु रस से हुए आहार दिवस अक्षय तृतीया के महापर्व पर उपाध्याय मुनि श्री आदिश सागर जी महाराज की अहार महापारणा हुई। इस अवसर पर अनेक महानुभावों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसी अवसर पर आज की शांति धारा का सौभाग्य इंदु , विहान जैन सपरिवार वसुंधरा गाजियाबाद उप्र, पल्लव जैन सपरिवार कलकत्ता, ओमप्रकाश जैन, अंशुल जैन सपरिवार तिजारा, चंद्र कुमार अरुणा पीयूष सपना कृष पर्ल जैन सपरिवार हैदराबाद को प्राप्त हुआ। महापारणा आहार दान आहारचर्या के पुण्यार्जक परिवार आदीश्वर प्रसाद जैन सपरिवार तिजारा, ओमप्रकाश ,अंशुल जैन सपरिवार तिजारा, अखिलेश जैन सपरिवार नोएडा , मौजीलाल जैन सपरिवार नागपुर , चंद्र कुमार अरुणा पियूष सपना कृष पर्ल जैन सपरिवार हैदराबाद, चेतन दोषी सपरिवार अकलूज, सुनील प्रखर सपरिवार चेन्नई , नेमिचन्द दगड़ा सपरिवार असम, राजेश रागी रत्नेश जैन पत्रकार सपरिवार बकस्वाहा रहे।

साधना, ध्यान, तप के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

श्री गुरुदत्त दि. जैन उदासीन आश्रम द्रोणगिरि के अधिष्ठाता भागचंद्र जैन पीली दुकान ने बताया कि श्री गुरुदत्तादि सहित साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण स्थली लघु सम्मेद शिखरजी श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि प्रकृति की अदभुत छठा सुरम्य वातावरण शयामरी नदी के तट पर स्थित श्री गुरुदत्त दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम साधना, ध्यान, तप के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है। त्यागी वृति आत्म साधना के लिए अग्रसर उदासीन एकल एवं गृहस्थ युगल दंपति सभी के लिए यहां आवास सात्विक शुद्ध आहार औषधि उपचार वैयावृत्ति की श्रेष्ठतम व्यवस्था नि:शुल्क रहती है। यहां सभी आत्मसाधना कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यहां भव्य सहस्त्रकूट जिनालय भी निर्माणाधीन है। दान की महिमा अचिंत्य बताई है दानों में दान महादान आहार दान है, वह भी महाव्रती त्यागी आत्मसाधना में रत श्रावकों को दिया गया आहार दान का महाफल होता है। कमेटी ने अपील की है कि आप स्वयं आश्रम में पधार कर अपने कर कमलों से आहार दान देकर सौभाग्य प्राप्त करें।आप यदि नहीं आ सकते तो विभिन्न प्रकार से दान देकर तथा अति चमत्कारी सहस्त्रफणी पारसनाथ भगवान की शांतिधारा करवाकर पुन्य प्राप्त करें।

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