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मां सरस्वती एवं लक्ष्मी की महाअर्चना : आराधना के साथ ज्येष्ठ मास का समापन 


 सरस्वती एवं लक्ष्मी की महा अर्चना के साथ ज्येष्ठ मास का समापन हुआ। 1008 कलशों से भगवान ऋषभदेव का महामस्तकाभिषेक किया गया भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर बडी मूर्ति रायगंज अयोध्या में स्थापित है। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


अयोध्या। मां सरस्वती एवं लक्ष्मी की महा अर्चना के साथ ज्येष्ठ मास का समापन हुआ। 1008 कलशों से भगवान ऋषभदेव का महामस्तकाभिषेक किया गया।

भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर बडी मूर्ति रायगंज अयोध्या में स्थापित है। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सानिध्य में ज्येष्ठ मास में होने वाले व्रत एवं शारदा पक्ष का माता सरस्वती एवं माता लक्ष्मी की महाआराधना की गई। प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन अयोध्या ने कहा कि जैन शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ जिनवर अर्थात 24 तीर्थंकरों में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का एक महीने तक मिट्टी के कलश द्वारा बाल ब्रह्मचारिणी बालिकाएं एवं समस्त श्रद्धालुगण महाअभिषेक करते हैं। ज्येष्ठ जिनवर का व्रत जैन शास्त्रों में पाया जाता है। जिसके अनुसार इस व्रत को करने वाले प्रतिदिन भगवान ऋषभदेव की पूजा एवं आराधना करते हैं।

ऋषभदेव का पूजन विधान हमें ग्रंथों में प्राप्त होता है

अयोध्या दिगम्बर जैन मंदिर के प्रवक्ता विजय कुमार ने बताया कि शारदा पक्ष होने के कारण प्रतिदिन मां सरस्वती की आराधना एवं मां सरस्वती की प्रतिमा का श्रृंगार किया जाता है। जिसमें 108 मंत्रों द्वारा मां सरस्वती की आराधना की जाती है। फल मेवा, मिष्ठान, फूल, अगरबत्ती आदि वस्तुओं से मां को अर्घ्य समर्पित किया जाता है। इसे अधिकतम पढ़ने वाले बालक बालिका करते हैं एवं मां सरस्वती की आराधना जाप्य मंत्रों द्वारा करते हैं। इसी श्रृंखला में माता लक्ष्मी का शृंगार समस्त सुहाग की वस्तु चूडी बिन्दी, काजल, मेंहदी, बिछुओं आदि मंत्रों के साथ समर्पित किए जाते हैं एवं व्रत करने वाले जाप्य अनुष्ठान विधि विधान पूर्वक करते हैं। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया कि ज्येष्ठ जिनवर भगवान ऋषभदेव का पूजन एवं विधान हमें प्राचीन ग्रंथों में प्राप्त होता है एवं सदियों से यह प्रथा चली आ रही है। इसी श्रृंखला में सुख शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति के लिए माता सरस्वती एवं माता लक्ष्मी की महाअर्चना शारदा पक्ष में करने वालो को पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आर्यिका चंदनामती माताजी द्वारा 108 मंत्रों से माता की गोद भराई एवं महा अर्चना का कार्यक्रम किया गया। पीठाधीश स्वस्ति श्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के मार्गदर्शन में आए हुए भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। शाम को भगवान ऋषभदेव माता सरस्वती एवं माता लक्ष्मी की मंगल आरती 108 दीपकों से की गई।

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