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आचार्य श्री के मंत्रोच्चार से दूर हुआ उपसर्ग

महावीर जी.राजेश पंचोलिया। विगत तीन अक्टूबर को श्री शांति वीर नगर, महावीर जी में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ के सानिध्य में 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के समक्ष 1008 विशेष द्रव्यों से चार दीक्षार्थी साधना दीदी, नेहा दीदी, दीप्ति दीदी तथा पूनम दीदी विशेष पूजन रही थीं।

अनायास ही मंदिर परिसर में लगे मधुमक्खी के छत्ते से सैकड़ों मधुमक्खियां उड़ीं, जिसमें से मुनि श्री चिंतन सागर जी, मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी तथा दीक्षार्थी साधना दीदी, नेहा दीदी तथा श्रावक गण प्रिंस जैन, राजाखेड़ा समर कंठाली, अजय पंचोलीया, इंदौर, लविश पंचोलिया, इंदौर, शालू मनीष, दिल्ली को मधुमक्खियों ने काट लिया। आचार्य श्री अडिग अविचल रहे। उसी समय वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने महावीराष्टक शांति भक्ति भक्तामर पाठ के कुछ श्लोकों का वाचन किया।

मधुमक्खियों का उपसर्ग तुरंत दूर हो गया। पांच मिनट बाद ही सभी मधुमक्खियां शांत हो गईं और हजारों की भीड़ में अन्य किसी को भी क्षति नहीं पहुंची। यही नहीं, अगले दिन चार अक्टूबर को उसी स्थान पर पुनः 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का पंचामृत महामस्तकाभिषेक तथा गणधर वलय विधान की पूजन आचार्य श्री सानिध्य में हजारों की उपस्थिति में हुआ। मधुमक्खियां पुनः उड़ीं पर किसी को क्षति नहीं हुई। पांच अक्टूबर को भी शान्ति वीर नगर में दीक्षाएं हुईं।

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