जैन धर्म के तेरहवें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 19 जून को मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार भगवान का मोक्ष कल्याणक आषाढ़ कृष्ण अष्टमी के दिन आता है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के मोक्ष कल्याण के अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण पाठ, निर्वाण लाडू आदि चढ़ाने के साथ ही विविध विधानों से पूजन आदि किया जाता है। आराधना के इस दौर में श्रद्धालु भक्ति भाव से प्रभु को स्मरण करते हैं। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उप संपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के तेरहवें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 19 जून को मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार भगवान का मोक्ष कल्याणक आषाढ़ कृष्ण अष्टमी के दिन आता है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के मोक्ष कल्याण के अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण पाठ, निर्वाण लाडू आदि चढ़ाने के साथ ही विविध विधानों से पूजन आदि किया जाता है। आराधना के इस दौर में श्रद्धालु भक्ति भाव से प्रभु को स्मरण करते हैं। भगवान विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक आषाढ़ कृष्णा अष्टमी को हुआ था। यह दिन उन भक्तों के लिए खास है, जो भगवान के मोक्ष की खुशी मनाते हैं। विमलनाथ जी के मोक्ष कल्याणक तिथि आषाढ़ कृष्णा अष्टमी के दिन मनाया जाता है। भगवान ने श्री सम्मेद शिखर जी से निर्वाण प्राप्त किया था।
इनके समवशरण में 55 गणधर, 5500 केवली, 68,000 मुनि, 1,03,000 आर्यिका, 2 लाख श्रावक और 4 लाख श्राविकायें थीं। भगवान विमलनाथ ने खड्गासन में मोक्ष प्राप्त किया था। जैन धर्म शास्त्रों के अनुसार मोक्ष कल्याणक उस दिन का प्रतीक है, जब भगवान ने जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त की थी। यह दिन भक्तों के लिए व्रत रखने, पूजा-अर्चना करने और दान-पुण्य करने का अवसर है। निर्वाण लड्डू चढ़ाना मोक्ष प्राप्ति की खुशी का प्रतीक माना जाता है।













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