जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ का गर्भकल्याणक इस बार 26 जुलाई को आ रहा है। पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल द्वितीया को भगवान सुमतिनाथ का गर्भ कल्याणक आता है। दिगंबर जैन समाज के मंदिरों, तीर्थ स्थलों सहित अन्य चैत्यालयों में धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की संकलित और संयोजित प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ का गर्भकल्याणक इस बार 26 जुलाई को आ रहा है। पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल द्वितीया को भगवान सुमतिनाथ का गर्भ कल्याणक आता है। इस दिन राजा मेघप्रभ की पत्नी रानी सुमंगला ने भगवान सुमतिनाथ को गर्भ में धारण किया था। भगवान के गर्भकल्याणक दिगंबर जैन समाज के मंदिरों, तीर्थ स्थलों सहित अन्य चैत्यालयों में धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य इत्यादि समर्पित कर दिव्य आराधना का दौर रहेगा।
यह उल्लेखनीय है कि गर्भ कल्याणक जैन धर्म के पांच कल्याणकों में से एक हैं, जो तीर्थंकर के जीवन की पांच महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रतीक है। यह दिन जैन धर्मावलंबियों द्वारा बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा और अर्चना की जाती है और तीर्थंकर के जीवन और शिक्षाओं पर प्रवचन आदि भी होते हैं।
सुमतिनाथ भगवान के बारे में यह भी विदित है
सुमतिनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में अयोध्या नगरी में हुआ था। उनके पिता का नाम राजा मेघप्रभ और माता का नाम रानी सुमंगला था। जैन धर्म के अनुसार, सुमतिनाथ का जन्म चैत्र शुक्ल एकादशी को हुआ था। उनके यक्ष का नाम तुम्बुर और यक्षिणी का नाम वज्रांकुशा था।
गर्भ कल्याणक से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि एक बार रानी सुमंगला को स्वप्न में 14 शुभ वस्तुएं दिखाई दीं, जो एक तीर्थंकर के जन्म का संकेत थीं। यह स्वप्न देखने के बाद रानी और राजा दोनों बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने भगवान सुमतिनाथ के जन्म की प्रतीक्षा शुरू कर दी। इस प्रकार श्रावण शुक्ल द्वितीया को भगवान सुमतिनाथ का गर्भ में आगमन हुआ और यह दिन जैन धर्म में गर्भ कल्याणक के रूप में मनाया जाता है।













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