तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। शनिवार 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन मुनिराजों के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन बेला में 6 बजे श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से पूजन किया जाएगा। इसके बाद 7 बजे रक्षाबंधन विधान होगा। जिसमें मुनि विष्णुकुमार एवं अन्य 700 मुनिराजों की पूजा-अर्चना करते हुए 700 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। प्रातः 8.30 बजे युगल मुनिराजों के प्रवचन होंगे। प्रवचनों के बाद भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू अर्पित होगा। मुनिराजों द्वारा रक्षा सूत्रों का वितरण भी होगा।
भजन भक्ति के साथ होंगे सभी विधान
भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन विधान के लिए सागर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित पवनकुमार शास्त्री दीवान मुरैना आए हुए हैं। विधानाचार्य दीवानजी विधान सहित सभी कार्यक्रमों को मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराएंगे। इस अवसर पर संघस्थ ब्रह्मचारी राहुल भैयाजी गंज बासौदा, चक्रेश शास्त्री मुरैना, संजय शास्त्री सिहोनिया, नवनीत शास्त्री मुरैना एवं अन्य विद्वान, त्यागीवृति विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में भजन गायक एवं संगीतकार मनीष जैन एंड पार्टी द्वारा विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।
निर्वाण कांड निर्वाण कांड का वाचन होगा
रक्षाबंधन वाले दिन जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धार्मिक उत्साह से मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन मंदिरों में सभी श्रावक एवं श्राविकाएं भगवान श्रेयांसनाथ का विशेष पूजन एवं भक्ति करते हुए उनकी उपासना करेंगे। सभी लोग एक साथ भक्ति एवं श्रद्धा के साथ निर्वाण कांड निर्वाण कांड का वाचन करते हुए, मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ निर्वाण लाड़ू समर्पित करेंगे। सभी भक्तगण महामंत्र नमोकार का जाप एवं जिनेंद्र प्रभु की स्तुति करते हुए भक्ति भाव के साथ पूजन अर्चन करेंगे।
भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है रक्षाबंधन
जैन संत मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने बताया कि पौराणिक काल में अकंपनाचार्य के नेतृत्व में 700 जैन मुनियों का एक संघ हस्तिनापुर पहुंचा। राजा बलि ने उन पर उपसर्ग किया। जिससे मुनियों को कष्ट होने लगा। मुनि विष्णुकुमार ने वामन का रूप धारण कर बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में ही सारा संसार नापकर मुनियों की रक्षा की। इस घटना को जैन धर्म में रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म में रक्षा बंधन न केवल भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्र, धर्म, और समाज की रक्षा का भी संकल्प लेने का दिन है। इस दिन, जैन धर्मावलंबी मंदिर जाते हैं, मुनि विष्णु कुमार और 700 मुनियों की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को राखी बांधकर एक-दूसरे की रक्षा एवं देश, धर्म, संस्कृति, साधु संतों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
जैन संस्कृत विद्यालय में होगा शांतिनाथ विधान का समापन
नगर के श्री गोपाल दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय में मुनिराजों के पावन सान्निध्य एवं विधानाचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री के आचार्यत्व में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में सोलह दिवसीय विधान का आयोजन चल रहा है। शनिवार 9 अगस्त को विधान के अंतिम दिन विश्व शांति महायज्ञ के आयोजन के साथ ही सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान का समापन होगा।













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