जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक पूर्ण भक्ति भावना के साथ 2 जुलाई को मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार यह आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को आता है। इस दिन भगवान नेमिनाथ ने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर मोक्ष गमन किया था। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह विशेष संकलित प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म आदि से अनादि है। इस धर्म में तीर्थंकरों ने अवतरण लेकर अपने तप, संयम, त्याग और तपस्या से जैन समाज को धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्तियों से परिचित करवाया। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने भी जैन धर्म की धर्म ध्वजा को आगे रखते हुए अपने जन्म, तप और ज्ञान तथा साधना से सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि के माध्यम से समाजजनों को आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण कर मोक्ष मार्ग की ओर प्रवृत किया। भगवान नेमिनाथ ने आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जूनागढ़ के पास गिरनार पहाड़ियों पर मोक्ष प्राप्त किया था और एक सिद्ध बन गए, एक मुक्त आत्मा जिसने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर दिया है। महावीर, पार्श्वनाथ और ऋषभनाथ के साथ नेमिनाथ उन चौबीस तीर्थंकरों में से एक हैं, जो जैनियों के बीच सबसे अधिक भक्ति पूजा को आकर्षित करते हैं।
इस बार खास है भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याण
इस बार भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक बहुत खास है। इस दिन समूचे देश में भगवान के मंदिरों में मोक्ष कल्याण के अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण सहित अनेकानेक विधान कर निर्वाण पाठ करते हुए भगवान को निर्वाण लाडु चढ़ाया जाएगा। साथ ही इस बार जैन समाज के 22 वें जैन तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धर्म पद यात्रा का शुभारंभ दिल्ली से किया गया। इसका समापन गिरनारजी में भगवान के चरणों में निर्वाण लाडु समर्पित कर पूजा-अर्चना के साथ होगा। इस पद यात्रा का मुख्य उद्देश्य गिरनार पर्वत पर कब्जे को रोकना है। जैन समाज द्वारा अहिंसक तरीके से पद यात्रा का निर्णय लिया गया है।
यह यात्रा अब गिरनारजी के करीब-करीब पहुंच चुकी है। धर्मपद यात्रा में शामिल लोगों ने बताया कि गिरनारजी में जैन समाज के साधुओं पर अत्याचार किया गया और जैन समाज के लोगांे को दर्शन करने से रोका जाता था। जिसमें आचार्य निर्मल सागर ने भी इस पर कब्जे और अत्याचार रोकने के लिये प्रयास किया था। इन्ही कारणों को लेकर जैन समाज ने एकजुटता दिखाकर 23 मार्च से 2 जुलाई भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक तक पद यात्रा का आयोजन कर गिरनार पहुंचना सुनिश्चित किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुगल रिचर्स इंटरनेशनल के डायरेक्टर डॉ. अमित जैन एवं रीनू जैन एडवोकेट ने गिरनार यात्रा के अध्यक्ष संजय जैन को अपना ऑफिशियल समर्थन पत्र भी विगत दिनों सौंपा था। इस धर्मपद यात्रा में साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में देश के हर शहर से बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज की महिला और पुरुष शामिल होकर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक स्थल गिरनारजी की पांचवी टोंक पर पूजा-आराधना को आतुर हैं।













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